अब यह मूर्ति भारत में वापस आने के साथ ही उम्मीद है कि अन्नपूर्णा दरबार का सौ साल बाद एक अभिन्न हिस्सा भी बन जाएगी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि मूर्ति जब भारत आएगी, उसके बाद आगे की प्रक्रिया पूर्ण होगी। वैसे अभी कुछ दिन पहले कर्नाटक से चोरी हुई मूर्तियां जब भारत आईं तो उन्हें मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार को सौंप दिया। इससे उम्मीद है कि यह मूर्ति काशी की धरोहर है और काशी आएगी।
1936 में मैकेंजी ने करवाई थी मूर्ति की वसीयत
भारतीय कलाकार दिव्या मेहरा ने गैलरी के स्थायी संग्रह में पाया कि इस मूर्ति की वसीयत 1936 में मैकेंजी ने करवाई थी और गैलरी के संग्रह में जोड़ा गया था। दिव्या ने मुद्दा उठाया और कहा कि यह अवैध रूप से कनाडा में लाई गई है। शोध में पता चला कि मैकेंजी ने 1913 में भारत यात्रा की थी। यह मूर्ति उसी के बाद यहां से कनाडा पहुंची। मां अन्नपूर्णा अपने एक हाथ में खीर और दूसरे में चम्मच लिए हुए हैं।