नसीम ने बताया कि शहीदा को तो 2007 में नागरिकता मिल गई पर बच्चियों को नहीं मिल पाई थी। इसके बाद नसीम और शाहिदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क कार्यालय से संपर्क किया और दो साल की कागजी कार्रवाई के बाद उनकी बेटियों को भी भारतीय नागरिकता मिल गई। इसके बाद दोनों बहनों ने आज पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
माहेरुख ने वोट देने के बाद बताया कि आज मुझे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिली है। मुझे आज वोट देने का अधिकार मिला है, अपनी सरकार चुनने का अधिकार मिला है। मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैं हिन्दुस्तान की बेटी हूं।