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Lok Sabha Election: 40 साल में 53 फीसदी बढ़ा BJP का वोट शेयर, देखें- 1984 के आम चुनाव के आंकड़ें

Sun, 12 May 2024 05:07 PM IST
अमन विश्वकर्मा रोहित चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Lok Sabha Election: डॉ. मुरली मनोहर जोशी को बसपा के प्रत्याशी मुख्तार अंसारी से कड़ी टक्कर मिली। 30.52 फीसदी वोट शेयर के साथ जोशी वाराणसी सीट से सांसद चुने गए। राममंदिर आंदोलन के बाद यह अब तक का भाजपा का सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा।
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लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दस साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी का साल दर साल प्रदर्शन संवरता रहा है। वर्ष 1980 में पार्टी की स्थापना हुई। चार साल बाद पार्टी ने 1984 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा। उसे केवल दो सीटों पर जीत मिली। वाराणसी में ओमप्रकाश सिंह भाजपा के उम्मीदवार थे। उन्हें 40,281 यानी 10.94 फीसदी मत हासिल हुए थे। वे चौथे पायदान पर रहे।

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1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के श्यामलाल यादव ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 41.58 फीसदी मत मिले थे। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार वाराणसी से जीते। उन्हें 6,74,664 यानी 63.62 फीसदी वोट मिले। इस तरह चार दशक में भाजपा का वोट शेयर 52.68 फीसदी बढ़कर 63.62 फीसदी पर पहुंच गया।

पिछले चार दशक में नौ आम चुनाव हुए। इनमें वाराणसी सीट से सात बार भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। इस सीट से सर्वाधिक तीन बार शंकर प्रसाद जायसवाल सांसद चुने गए। उन्होंने 1996, 98 और 1999 में जीत हासिल की। उनसे पहले 1991 में इस सीट से श्रीष चंद्र दीक्षित ने कमल खिलाया था। दीक्षित को 41.10 फीसदी वोट हासिल हुए थे। 2009 में वाराणसी सीट से भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 
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30 साल बाद 2004 में वाराणसी सीट कांग्रेस के पंजे में
1984 के बाद वाराणसी में कांग्रेस को अगली जीत के लिए 30 साल तक इंतजार करना पड़ा। 2004 में कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्र ने भाजपा के तीन बार के सांसद शंकर प्रसाद जायसवाल को लगभग 55 हजार वोटों से हरा दिया। मिश्र को 206904 वोट मिले थे। यह कुल पड़े वोट का 32.68 फीसदी रहा। 

इससे पहले 1999 में कांग्रेस के प्रत्याशी राजेश मिश्र को 25.48 फीसदी वोट मिले थे। इस चुनाव में वह दूसरे स्थान पर थे। 2009 में डॉ. राजेश मिश्र तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। मगर उन्हें चौथे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। उन्हें 9.98 फीसदी वोट ही मिले।

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चार दशक में 27 फीसदी घटा कांग्रेस का वोट

वाराणसी में कांग्रेस का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1984 के चुनाव में दर्ज किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में आम चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने सहानुभूति की लहर के सहारे इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। पार्टी ने वाराणसी समेत देश भर की 404 लोकसभा सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वाराणसी से श्यामलाल यादव जीते थे। उन्हें 1,53,076 वोट मिले थे। 

वोट शेयर के लिहाज से यह आंकड़ा 41.58 फीसदी था। मगर उसके बाद हुए नौ आम चुनाव में पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे आता गया। 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को 1,52, 548 यानी 14.38 फीसदी वोट हासिल हुए थे। राय तीसरे स्थान पर थे जबकि सपा की शालिनी यादव यहां दूसरे स्थान पर रहीं।

बीते दो चुनाव में तीसरे स्थान पर रही कांग्रेस
2014 के मुकाबले 2019 में भले ही कांग्रेस के वोट शेयर में दोगुना का इजाफा हुआ मगर पार्टी दोनों ही चुनाव में तीसरे स्थान पर रही। दोनों बार अजय राय कांग्रेस के उम्मीदवार थे। 2014 में राय को 75,614 वोट मिले थे जबकि 2019 में उन्हें 1,52,548 वोट मिले। 

उनका वोट शेयर 7.34 से बढ़कर 14.38 फीसदी पर पहुंचा मगर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती नहीं दे पाए। 2014 में आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और 2019 में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी शालिनी यादव दूसरे स्थान पर रहीं।

मोदी मैजिक : दस साल में दोगुना हुआ भाजपा का वोट
2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र मोदी वाराणसी संसदीय सीट से मैदान में उतरे। उन्हें 5,81,022 वोट यानी 56.37 फीसदी वोट मिले। 2009 के चुनाव के मुकाबले भाजपा के वोट शेयर में दोगुना उछाल आया। मोदी मैजिक का ही नतीजा था कि 2019 के चुनाव में भाजपा ने न केवल अपना पुराना रिकाॅर्ड तोड़ा बल्कि 63.62 फीसदी वोट हासिल कर पूर्वांचल की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।ो
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