वाराणसी में कांग्रेस का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1984 के चुनाव में दर्ज किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में आम चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने सहानुभूति की लहर के सहारे इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। पार्टी ने वाराणसी समेत देश भर की 404 लोकसभा सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वाराणसी से श्यामलाल यादव जीते थे। उन्हें 1,53,076 वोट मिले थे।
वोट शेयर के लिहाज से यह आंकड़ा 41.58 फीसदी था। मगर उसके बाद हुए नौ आम चुनाव में पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे आता गया। 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को 1,52, 548 यानी 14.38 फीसदी वोट हासिल हुए थे। राय तीसरे स्थान पर थे जबकि सपा की शालिनी यादव यहां दूसरे स्थान पर रहीं।
बीते दो चुनाव में तीसरे स्थान पर रही कांग्रेस
2014 के मुकाबले 2019 में भले ही कांग्रेस के वोट शेयर में दोगुना का इजाफा हुआ मगर पार्टी दोनों ही चुनाव में तीसरे स्थान पर रही। दोनों बार अजय राय कांग्रेस के उम्मीदवार थे। 2014 में राय को 75,614 वोट मिले थे जबकि 2019 में उन्हें 1,52,548 वोट मिले।
उनका वोट शेयर 7.34 से बढ़कर 14.38 फीसदी पर पहुंचा मगर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती नहीं दे पाए। 2014 में आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और 2019 में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी शालिनी यादव दूसरे स्थान पर रहीं।
मोदी मैजिक : दस साल में दोगुना हुआ भाजपा का वोट
2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र मोदी वाराणसी संसदीय सीट से मैदान में उतरे। उन्हें 5,81,022 वोट यानी 56.37 फीसदी वोट मिले। 2009 के चुनाव के मुकाबले भाजपा के वोट शेयर में दोगुना उछाल आया। मोदी मैजिक का ही नतीजा था कि 2019 के चुनाव में भाजपा ने न केवल अपना पुराना रिकाॅर्ड तोड़ा बल्कि 63.62 फीसदी वोट हासिल कर पूर्वांचल की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।ो