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Satta Ka Sangram: काशी का मिजाज भांपने पहुंचा चुनावी रथ, नेताओं ने एक दूसरे पर लगाए आरोप- प्रत्यारोप

Tue, 28 May 2024 06:10 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Satta Ka Sangram in Varanasi: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ मंगलवार को काशी नगरी में पहुंचा। यहां चाय पर चर्चा के बाद युवाओं से बातचीत की गई। उसके बाद सत्ताधारियों और उनके समर्थकों से विमर्श हुआ।
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काशी में चुनावी चर्चा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' मंगलवार को देश के सबसे हॉट सीट काशी में पहुंचा। सुबह अस्सी घाट पर आम मतदाताओं के साथ चर्चा की गई। इसके बाद दोपहर में बीएचयू कैंपस में युवाओं से बातचीत की गई। शाम को शहीद उद्यान पार्क सिगरा में सत्ताधारियों और उनके समर्थकों से चर्चा की गई। 
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इस दौरान राजनीति में पूर्वांचल का नेतृत्व करने वाली काशी नगरी में विकास और समस्याओं के साथ जाति और धर्म के मुद्दों पर खूब बहस हुई। शहीद उद्यान पार्क सिगरा में चुनावी चर्चा के दौरान कुछ लोगों ने कहा कि हमको शिक्षा दीजिए, महंगाई से छुटकारा दीजिए, रोजगार दीजिए। तो वहीं कुछ लोगों ने देश के विकास और सम्मान का मुद्दा भी उठाया। 

भारतीय जनता पार्टी के समर्थक ने रोजगार के मुद्दे पर पलटवार करते हुए कहा कि काशी में रोजगार के लिए बहुत साधन हैं। विश्वनाथ मंदिर के बाहर टीका लगाने वाला भी दिनभर में तीन हजार कमाकर जाता है। ऑटो रिक्शा वाला भी शाम को चार से पांच हजार कमा लेता है। 

वहीं विपक्ष के एक समर्थक ने कहा कि आकर्षण अलग चीज होती है। जमीनी हकीकत अलग होता है। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में इतना पैसा और इतनी जमीन गई, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ। यहां रोजगार नहीं है, शिक्षा नहीं है। बुनकरों का इलाका है, लेकिन यहां के सभी बुनकर सूरत चले गए। बनारसी साड़ियों का गढ़ बनारस था। लेकिन यहां के बुनकर पलायन को मजबूर हो रहे हैं।

वहीं जाति-धर्म के मुद्दे पर भाजपा समर्थक ने कहा कि कोरोना काल में वैक्सीन और मुफ्त राशन देने के लिए सरकार ने जाति नहीं देखा। आज पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। 
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भाजपा समर्थक ने कहा कि लाशों की होम डिलीवरी सपा सरकार में होती थी। ये लोग लोकतंत्र की बात करते हैं। काम न करने वाले पार्टी के लोगों का काम होता है कि सिर्फ चुनाव के समय दौरा करते हैं। चुनावी मौसम में मंदिर जाते हैं। रोजा इफ्तार चुनावी दौर में बंद हो गया है। टोपी उतर गई है। देश का मूड जब इन्हें समझ आ रहा है तो ये लोग दौरा कर रहे हैं। 

रोजा इफ्तार की बात का जवाब देते हुए एक मुस्लिम वोटर ने कहा कि आपकी सरकार बोल दे क्या ये गलत है। चुनावी मौसम में ही नहीं हमेशा रोजा इफ्तार होता है।    

विपक्ष के एक समर्थक ने कहा कि भाजपा सरकार के हाथ में तिरंगा, दिमाग में इनके दंगा है। धर्म की अफीम पिलाई जा रही है। टीवी पर सिर्फ विकास दिखाया जा रहा है। पिता मेहनत करके मर रहा है, बेटा नेतागिरी कर रहा है।  
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