UP Lok Sabha Election Result 2024 : पूर्वांचल की 13 लोकसभा सीटों में सपा नेताओं के परिवार के सदस्यों को सफलता मिली। वहीं पूर्वांचल की चार लोकसभा सीटों पर नीरज शेखर, रिंकी कोल, ललितेश पति त्रिपाठी और अरविंद राजभर को जीत दिलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन ये दिग्गज सियासी विरासत को संभाल नहीं पाए।
लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल के कई सियासी परिवारों का रसूख उनके उत्तराधिकारी बरकरार नहीं रख सके। बलिया से आठ बार लोकसभा सदस्य चुने गए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को मंगलवार को सपा प्रत्याशी सनातन पांडेय ने मात दे दी। नीरज शेखर ने अपने पिता की मृत्यु के बाद बलिया से लोकसभा का उप चुनाव और फिर 2009 का आम चुनाव जीता था। फिलहाल वह भाजपा से राज्यसभा के सदस्य हैं।
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पकौड़ी लाल का टिकट काट बहू रिंकी को बनाया था प्रत्याशी
राबर्ट्सगंज (सु.) लोकसभा से अपना दल-एस ने अपने सांसद पकौड़ी लाल कोल का टिकट काटकर उनकी बहू विधायक रिंकी कोल को प्रत्याशी बनाया था। पकौड़ी लाल कोल राबर्ट्सगंज से 2009 में सपा से भी सांसद रह चुके हैं। उनकी बहू रिंकी कोल को सपा के छोटेलाल खरवार ने आम चुनाव में मात दे दी।
घोसी से अरविंद राजभर को भी मिली हार
घोसी लोकसभा से सुभासपा प्रमुख और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के पुत्र अरविंद राजभर एनडीए के प्रत्याशी थे। आम चुनाव में उन्हें भी सपा के राजीव राय के सामने हार का सामना करना पड़ा।
पूर्वांचल के दिग्गज कांग्रेसी रहे पंडित कमला पति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश पति त्रिपाठी भदोही से एआईटीएमसी के प्रत्याशी थे। आम चुनाव में उन्हें भाजपा के डॉ. विनोद कुमार बिंद ने शिकस्त दी।मछलीशहर (सु.) लोकसभा से पूर्व सांसद तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज चुनाव ने पहली ही बार में भाजपा के बीपी सरोज को मात दी। आजमगढ़ लोकसभा से सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव ने भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ को मात दी। इस सीट से दिग्गज सपाई रहे मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव वर्ष 2014 और 2019 में सांसद चुने जा चुके हैं।
भदोही से ललितेश पति का प्रयोग नहीं हुआ सफल
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे पंडित कमला पति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश पति त्रिपाठी कांग्रेस और सपा के सहयोग से एआईटीएमसी के सिंबल से भदोही से चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, उनका यह प्रयोग सफल नहीं रहा और मतदाताओं ने उन्हें दूसरे स्थान पर रखा। ब्राह्मण और बिंद बिरादरी बाहुल्य भदोही लोकसभा क्षेत्र में ललितेश पति की कड़ी मेहनत के बाद भी उनके सिंबल से दूरदराज के गांवाें के मतदाता अनजान रहे। इस बात को मतदान से पहले ललितेश पति त्रिपाठी ने भी 'अमर उजाला' से स्वीकार किया था कि उनके शुभचिंतकों ने उन्हें कांग्रेस या सपा के सिंबल से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। मगर, उन्होंने ममता बनर्जी के स्नेह के कारण एआईटीएमसी के सिंबल पर ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उधर, भदोही में लगातार दो बार से लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर रही भाजपा ने संगठन स्तर से मतदाताओं को अपने पाले से छिटकने नहीं दिया। बल्कि और तगड़ी घेरेबंदी कर प्रतिद्वंद्वियों को मात दे दी।