अब्दुल ने बताया कि हम वहां पर मजदूरी करते हैं, हमारा ठेकेदार आजमगढ़ का निवासी हरुल्ला है, जो हमें दिहाड़ी पर काम पर लगाया था। लॉकडाउन के वजह से वह हमें कार्यस्थल पर छोड़कर भाग गया, और हम सब का मजदूरी भी उसी के पास है।
फोन करने पर फोन नहीं उठाता है। खाने पीने की कमी की वजह से हम सब ने फैसला किया कि पैदल ही हम अपने घर पटना के लिए निकलेंगे। हम बीते 26 तारीख के सुबह 6 बजे से ही आलमबाग लखनऊ से पैदल निकल गए और आज सारनाथ के आशापुर चौराहे पर पहुंचे और यहीं से बलुआ पुल पार करके पटना जाएंगे। पैसा पास ना होने से हम सब भूखे हैं। बस अब यह आस है कि किसी तरह हम अपने घर पहुंच जाएं।