दोपहर में पिजड़ा बगीचे में रखा गया। कुछ देर बाद पिजड़ा में मांस रखने की बात आई तो हमने दो मुर्गा की व्यवस्था की। दिन भर वन विभाग की टीम रणनीति ही बनाती रही और शाम होते होते तेंदुआ भाग निकला। क्षेत्र के लोग शाम होते ही भयभीत हो जाते हैं और दिन में खेत-बगीचा की ओर निकलने में भी डरते हैं।
चिरईगांव के पूर्व प्रधान धनंजय मौर्य ने कहा कि आखिरकार इलाके के ग्रामीण कब तक डर कर दिन-रात गुजारेंगे। जिला प्रशासन को ग्रामीणों की समस्या और उनके डर के बारे में विचार कर गंभीरता से उपाय करना चाहिए। ताकि, ग्रामीणों की दिनचर्या पहले जैसे सामान्य हो सके।
इलाके के सरस सोनकर, मनीष, पीयूष, साहिल गुड्डू और मीरा ने बताया कि तेंदुआ के हमले के डर के कारण हम लोग रोजमर्रा का अपना काम नहीं कर पा रहे हैं। डर लगा रहता है कि न जाने तेंदुआ कब किधर से आ जाए और हमला कर दे। ग्रामीणों के अनुसार बृहस्पतिवार की रात सीवों गाव में एक मवेशी को तेंदुए ने निशाना बनाया था।
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शनिवार को तेंदुआ के जो पद चिह्न मिले हैं, उससे पूरी संभावना है कि वह इस इलाके से बाहर चला गया है। इसके बावजूद वन विभाग की टीम इलाके में लगातार काॅम्बिंग कर रही है।
- स्वाती सिंह, डीएफओ।