इससे जहां बाबा विश्वनाथ के धाम आने वाले यात्रियों को सहूलियत होगी, वहीं उनका समय भी बचेगा। लक्ष्मण झूला पुल के साथ ही डोमरी में दो हजार वाहनों की पार्किंग भी बनाई जाएगी। बिहार, झारखंड, कोलकाता, चंदौली और रामनगर से आने वाले श्रद्धालु सड़क मार्ग की बजाय सीधे लक्ष्मण झूला के जरिए बाबा के धाम पहुंच सकेंगे।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि लक्ष्मण झूले के निर्माण के लिए जल्द ही डीपीआर तैयार कराई जाएगी। इसके सर्वे की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होगी। स्वामी विशुद्धानंद की प्रेरणा से कोलकाता के सेठ ने 1889 में ऋषिकेश में लोहे के तारों से पुल बनवाया था।
इससे पूर्व जूट की रस्सियों का ही पुल यहां पर था। लोग रस्सों के इस पुल पर लोगों को छींके में बिठाकर खींचा जाता था। लोहे के तारों से बना यह पुल 1924 की बाढ़ में बह गया था। इसके बाद मजबूत एवं आकर्षक पुल को निर्माण किया गया।