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बीएचयू विधि संकाय का शताब्दी समारोह: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ बोले- इतिहास में विधि का इस्तेमाल लोगों के शोषण के लिए हुआ

Sun, 08 May 2022 12:18 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़ - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू में विधि संकाय के शताब्दी समारोह का शुभारंभ शनिवार को हुआ। संकाय की विकास यात्रा के साथ ही उपलब्धियों और इससे जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्मृतियों को लोगों के साथ साझा किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन में विधि की अग्रणी भूमिका है।

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विधि के अंदर ही सामाजिक परिवर्तन की शक्ति भी है। महामना सभागार में आयोजित समारोह में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि संकाय ने 1970 के दशक में विधिक निशुल्क सहायता के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। कहा कि इतिहास में विधि का प्रयोग लोगों का शोषण करने के लिए हुआ, लेकिन आज विधि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। किसी भी राज्य की भूमिका वहां की जनता के प्रति कर्तव्य निभाने में होती है।

अधिवक्ता को निडर और  पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह गर्व की बात है कि बीएचयू विधिक सहायता केंद्र शुरू करने वाले 6 विश्वविद्यालयों में से एक है। युवा अधिवक्ताओं को लेकर उन्होंने कहा कि अधिवक्ता का कार्य पुरानी बाधाओं से बाहर निकलकर लोगों को न्याय प्रदान कराना है। अधिवक्ता को निडर, साहसी एवं सभी पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए।

गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और विधि संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. आरके मिश्र ने एलएलबी के तीन वर्षीय पाठ्यक्रम को लागू कराने के लिए बीएचयू के प्रयासों की चर्चा की। अध्यक्षता कर प्रो. वीके शुक्ला ने संकाय के उपलब्धियों की चर्चा कर सभी को बधाई दी। अतिथियों ने बनारस लॉ जर्नल 2021 एवं महामना छात्र लॉ जर्नल 2021 का विमोचन भी किया।

संकाय प्रमुख प्रो. अली मेहदी ने संकाय की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि अगले सत्र तक शताब्दी समारोह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम होंगे। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अखिलेंद्र कुमार पांडेय ने दिया है। इस दौरान विधि आयोग के अध्यक्ष और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कर्नल बाला सुब्रह्मण्यम, कर्नल इन्द्रसेन, बीएचयू वित्त अधिकारी अभय ठाकुर, छात्र अधिष्ठाता प्रो. केके सिंह, प्रो. एमए अंसारी, प्रो. जेपी राय, डॉ. आदेश कुमार मौर्या मौजूद रहे।
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लंबित हैं 4,65,496 आपराधिक मुकदमे

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत में करोड़ों वाद न्यायालय में लंबित हैं। 4,65,496 आपराधिक मुकदमे पिछले 10 से 20 वर्षों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित हैं। इसके अलावा यूपी के जिला न्यायालयों में 82,41,560 मुकदमे लंबित हैं, इसमें 30 प्रतिशत तो पिछले वर्ष दायर किए गए हैं। भारत में इन मुकदमों के निस्तारण हेतु विधिक प्रतिनिधित्व की कमी है। ऐसे में विधि की भूमिका और बढ़ जाती है।

विधिक छात्रों को मिले मध्यस्थता का प्रशिक्षण
बतौर विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहा कि भारत में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स पाठ्यक्रम विधि संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की देन है। प्रत्येक विधि स्नातक छात्र को 40 घंटे की मध्यस्थता का प्रशिक्षण मिलना चाहिए, इससे बहुत हद तक मुकदमों का दबाव कम होगा। विधि के पुरातन छात्र संकाय के लिए ब्रांड अंबेसडर होते हैं। उन्होंने छात्रों को समूह बनाकर गांवों को गोद लेकर वाद मुक्त बनाने की बात कही।

अतिथियों संग पूर्व संकाय प्रमुख सम्मानित
संकाय प्रमुख प्रो. अली मेहदी ने अतिथियों के साथ ही समारोह में मौजूद विधि संकाय के पूर्व प्रमुख और राष्ट्रीय न्यायिक शैक्षणिक संस्थान भोपाल के पूर्व उपनिदेशक प्रो. डीपी वर्मा, पूर्व संकाय प्रमुख, प्रो. बीएन पांडेय, पूर्व शिक्षिका आशा त्रिवेदी आदि को सम्मानित किया गया।
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