वाराणसी में रोपवे स्टेशन का मॉडल
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वाराणसी की सबसे बड़ी काशी विश्वनाथ परियोजना में 300 से ज्यादा संपत्तियों का निर्विवाद रूप से आपसी सहमति के आधार पर बैनामा कराया गया था। रोपवे रूट पर पड़ने वाली सरकारी जमीनें निशुल्क ली जाएंगी। इसके लिए पंजीकृत इकरारनामे के जरिये अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाएगा। काशी विद्यापीठ सहित अन्य सरकारी संस्थाओं से जमीन के लिए इकरारानामा कराने की तैयारी है। रोपवे के टाॅवर और स्टेशन के लिए करीब 40 संपत्तियों की आवश्यकता है। इसमें 18 संपत्तियां निजी हैं। करीब 3.7 किमी लंबी इस परियोजना में निजी जमीनों के लिए 60 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण में अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। इससे जमीन का मुआवजा देने में भी अड़चन आती है। विवाद बढ़ता है तो पूरी प्रक्रिया ठप हो जाती है। मामला अदालत तक पहुंचता है। परियोजना में देरी होती है, जबकि आपसी सहमति से जमीनों की खरीद में दिक्कत नहीं आती है। जमीन खरीद के बाद तत्काल कब्जा मिल जाता है।
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जमीनों की खरीद में भी काशी विश्वनाथ धाम मॉडल को ही अपनाया गया था। दरअसल, अयोध्या में जमीनों की खरीद को लेकर विवाद होने के बाद शासन के निर्देश पर यह मॉडल वहां लागू किया गया था। इसके बाद बिना किसी विवाद के रामलला के मंदिर के लिए जमीनों की खरीद पूरी कराई गई थी।
जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने कहा कि रोपवे परियोजना के लिए शासन से 60 करोड़ रुपये मिल गए हैं। विकास प्राधिकरण आपसी सहमति से जमीनों का बैनामा कराएगा। वीडीए के सचिव डा. सुनील वर्मा ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम की तरह ही रोपवे परियोजना के लिए आपसी सहमति से जमीनों के बैनामे कराए जाएंगे। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है। मंगलवार तक पहला बैनामा हो सकता है। अप्रैल अंत तक बैनामे की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।