केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का संबोधन सुनतीं छात्राएं
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केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आगे कहा कि भारत की पहचान दुनिया में हमेशा से ज्ञान केंद्र के रूप में रही है। हमें भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व में जन-जन तक पहुंचाना होगा। इस कार्य में नारी की भूमिका सबसे अहम है। श्रीमद्भागवत में भी कहा गया है कि हमारा पतन उस दिन से शुरू हुआ, जब हमने ज्ञान को अपने अंदर कैद करना शुरू कर दिया।
जो ज्ञान को दूसरों के साथ नहीं बांटता वो सरस्वती का उपासक नहीं है। गुरुकुल में बेटियों के शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारी संस्कृति अपनी रक्षा के लिए शस्त्र उठाने के लिए प्रेरित करता है। यह बड़े गर्व की बात है कि इस गुरुकुल में छात्राओं को शस्त्र के साथ शास्त्र में भी पारंगत हो रही है।
पाणिनी कन्या महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर सभागार में वेदपाठी 50 छात्राओं द्वारा शंख वादन किया गया। महाविद्यालय की 50 छात्राओं को उपाधि पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं अतिथियों ने स्वर्ण जयंती स्मारिका का भी विमोचन किया।
पाणिनी कन्या महाविद्यालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल
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केरल के राज्यपाल ने अपने संबोधन की शुरुआत काशी की आतिथ्य परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसी काशी में मेरा स्वागत हुआ तो कई साल पहले इसी शहर में मेरा काफी विरोध और हमला भी हो चुका है। तब पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर बहुत नाराज हुए थे। हमला करने वाले खुद उनकी पार्टी के सदस्य थे। वो गाड़ी से निकले थे और मोर्चा संभाला था। कई बार बनारस आना हुआ है। । लेकिन आज का जो अनुभव है, बहुत अद्भुत है। जिस दिव्यता के साथ आज स्वागत हुआ है, वो पहली दफा हुआ है।