प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया मुहिम से प्रभावित होकर अमेरिका के मिशिगन में रहने वाले वट्टी कुट्टी फाउंडेशन के निदेशक प्रो. महेंद्र भंडारी काशी को रोबोटिक सर्जरी की सौगात देने जा रहे हैं। 19 करोड़ रुपये की लागत वे इस सर्जरी के केंद्र को बीएचयू अथवा रेलवे के कैंसर अस्पताल में शुरू करना चाहते हैं। इस संबंध में उन्होंने बीएचयू के दो प्रोफेसरों से संपर्क साधा है। वे अपनी टीम के साथ 12 जून को काशी आ रहे हैं और सर्वे करके तय करेंगे कि केंद्र कहां स्थापित किया जाए। इसके बाद चार महीने में यह केंद्र काम करने लगेगा।
दिल्ली, मुंबई, गुड़गांव, पुणे, चेन्नई समेत देश में 13 चुनिंदा स्थानों पर पिछले करीब दस साल से रोबोटिक सर्जरी की जा रही है। यूपी, बिहार समेत अन्य प्रदेशों के लोग भी वहीं इलाज कराते हैं। काशी में यह सुविधा होने के बाद लोगों को हजारों किलोमीटर की दूरी तय नहीं करनी होगी। काशी में रोबोटिक सर्जरी के लिए पहल खुद प्रो. भंडारी ने की। उन्होंने इसके लिए बीएचयू के न्यूरोलाजी विभाग के हेड प्रो. वीएन मिश्रा और उनके माध्यम से आईएमएस के निदेशक प्रो. आरजी सिंह से बात की।
उन्होंने वादा किया है कि रोबोटिक सर्जरी के सफल होनेे तक उनकी टीम वाराणसी में रहेगी। पहले दो साल तक मुफ्त में सर्जरी की जाएगी जिसका खर्च फाउंडेशन उठाएगा। इसके बाद लोगों से कितनी फीस ली जाएगी इसका निर्धारण वह संस्थान करेगा जहां केंद्र स्थापित किया जाएगा। प्रो. महेंद्र भंडारी ने दूरभाष पर बताया कि रोबोटिक सर्जरी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वह काशी में केंद्र स्थापित करना चाहते हैं।
ये है रोबोटिक सर्जरी
रोबोट के जरिये डॉक्टर मरीजों का ऑपरेशन करते हैं। शरीर के जिन अंगों तक डॉक्टर के हाथ नहीं पहुंच पाते, वहां रोबोट आसानी से पहुंचते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस विधि से विशेषकर यूरोलाजी, आंकोलाजी और स्त्री रोगों से जुड़े आपरेशन किए जाते हैं। इसके जरिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली, मेदांता और कोकिला बेन अस्पताल में सर्जरी की जा रही है। ऑपरेशन का खर्च साधारण सर्जरी की अपेक्षा 25 प्रतिशत ज्यादा आता है।
प्रो. महेंद्र भंडारी
मूल रूप से बरेली के रहने वाले प्रो. महेंद्र भंडारी पहले लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई के निदेशक और फिर केजीएमयू के वीसी बने। उन्हें पद्ममश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2007 में वे अमेरिका चले गए। वे मिशिगन स्थित हेनरी फोर्ड अस्पताल के निदेशक हैं। वट्टी कुट्टी फाउंडेशन के निदेशक भी हैं। फाउंडेशन की मदद से वह भारत समेत विभिन्न देशों में रोबोटिक सर्जरी को बढ़ावा देते हैं। जस्टिस गिरधर मालवीय के पुराने मित्र भी हैं।