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महंत द्वारे बजी बधाई, चढ़ा बाबा विश्वनाथ का तिलक, परंपरागत तरीके से मनाया गया तिलकोत्सव

Thu, 18 Feb 2021 12:13 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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तिलक के लिए किया जा रहा बाबा का श्रृंगार - फोटो : अमर उजाला
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वसंत पंचमी पर काशी पुराधिपति श्री बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव का साक्षी बनकर काशी की जनता धन्य-धन्य हो गई। श्री आदि विश्वेश्वर के तिलकोत्सव के साथ ही काशी में फागुन की तैयारियां भी अब परवान चढ़ेंगी। मंगलवार की शाम को श्री काशी विश्वनाथ का तिलकोत्सव टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर विधि-विधान से संपन्न हुआ। बाबा के तिलकोत्सव के लिए महंत आवास कैलाश में परिवर्तित हो गया।

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सायं सात बजे जालान परिवार की अगुवाई में तिलक की रस्म पूरी की गई। शहनाई की मंगल ध्वनि और डमरुओं के निनाद के बीच तिलकोत्सव की बधइया यात्रा निकली। सात थाल में तिलक की सामग्री लेकर जालान परिवार इस शोभायात्रा का हिस्सा बना। थालों में बाबा के लिए वस्त्र, सोने की चेन, सोने की गिन्नी, चांदी के नारियल सजा कर रखे गए थे।

लोकाचार के अनुसार दूल्हे के लिए घड़ी और कलम के सेट भी एक थाल में सजाए गए थे।  काशीवासियों की भीड़ के साथ दशाश्वमेध मुख्य मार्ग से टेढ़ीनीम स्थित जालान गेस्ट हाउस तक पहुंची। यहां पहुंचने पर महंत परिवार ने उनकी अगवानी की।
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परिवार में सूतक लगने के कारण महंत परिवार के सदस्य इसके बाद होने वाले पूजन के विधान में शामिल नहीं हुए। कन्या पक्ष की ओर से केशव जालान, किशन जालान के सदस्यों ने तिलकोत्सव की रस्म पूरी की। पूजन का विधान संजीव रत्न मिश्र ने संपादित किया। पं. वाचस्पति तिवारी ने सपत्नीक रुद्राभिषेक किया।

सुबह से ही शुरू हो गई थीं रस्में
बसंत पंचमी की तिथि पर मंगलवार की भोर से ही बाबा विश्वनाथ के तिलक का उत्सव टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर आरंभ हुआ। भोर में 4 से 04:30 बजे तक बाबा विश्वनाथ की पंचबदन रजत मूर्ति की मंगला आरती उतारी गई। 06 से 08 बजे तक ब्राह्मणों द्वारा चारों वेदों की ऋचाओं के पाठ के साथ बाबा का दुग्धाभिषेक किया गया।

सुबह 8:15 बजे से बाबा को फ लाहार का भोग अर्पित किया गया। उसके उपरांत पांच वैदिक ब्राह्मणों ने पांच प्रकार के फ लों के रस से 8:30 से 11:30 बजे तक रुद्राभिषेक हुआ। पूर्वाह्न 11: 45 बजे पुन: बाबा को स्नान कराया गया। 12 से 12:30 बजे तक मध्याह्न भोग अर्पण एवं आरती की गई। 12:45 से 02:30 बजे तक महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाये गए। 02:30 से 04:45 बजे तक शृंगार के लिए कक्ष के पट बंद कर दिए गए।
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विश्वनाथ मंदिर से महंत आवास लाई गई बाबा की पंचबदन मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
भक्तों ने बाबा का दूल्हा रूप में किया दर्शन
बाबा विश्वनाथ के पंचबदन रजत प्रतिमा का संजीव रत्न मिश्र ने दूल्हा के रूप में शृंगार किया।  संध्या आरती एवं भोग के बाद सायं पांच बजे से भक्तों के दर्शन के लिए पट खोल दिए गए। भक्तों ने बाबा का दूल्हा स्वरूप में दर्शन किया।  

इस कार्य में मनोज शर्मा ने सहयोग किया। तिलकोत्सव के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। गीतकार कन्हैया दूबे केडी के संयोजन व संचालन में डॉ. अमलेश शुक्ला, स्नेहा अवस्थी आदि कलाकारों ने पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति की।
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