अधिवक्ता प्रतिवादी पक्ष ने बताया कि मैंने कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हुए एक प्रार्थना पत्र उन्हें दिया कि आप का व्यवहार निष्पक्ष नहीं है। आप पार्टी के रूप में यहां कार्यवाही करने के लिए आ रहे हैं। आप पर मुझको कोई भरोसा नहीं है। चार बजे कमीशन की कार्यवाही शुरू हुई और पश्चिमी तरफ जो चबूतरा है, उसकी वीडियोग्राफी कराई गई है।
उसके बाद कोर्ट कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद के प्रवेश द्वार को खुलवा कर अंदर जाने का प्रयास किया, जिस पर मैंने अपना विरोध दर्ज करवाया। अधिवक्ता ने बताया कि मैंने कहा कि कोर्ट का इस तरह का कोई आदेश नहीं है की बैरिकेडिंग के अंदर जाकर आप उसकी वीडियोग्राफी कर सकें। अधिवक्ता आयुक्त ने कहा कि मुझे ताला खुलवाकर उसकी वीडियोग्राफी करने का आदेश है, जबकि ऐसा कोई आदेश कोर्ट द्वारा नहीं है।
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे के खिलाफ नारेबाजी
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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा कि ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर के कुछ इलाकों के सर्वेक्षण पर अदालत का हालिया आदेश रक्तपात और मुस्लिम विरोधी हिंसा का रास्ता खोल रहा है।
वाराणसी की अदालत के आदेश की निंदा करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा कि काशी की ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण करने का यह आदेश 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का खुला उल्लंघन है, जो धार्मिक स्थलों के रूपांतरण पर रोक लगाता है। यह सरकार का कर्तव्य है कि वो कोर्ट के बताए कि वह गलत क्यों कर रही है। एक अन्य ट्वीट में लिखा कि अयोध्या के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अधिनियम भारतीय राजनीति की धर्मनिरपेक्ष विशेषताओं की रक्षा करता है जो संविधान की बुनियादी विशेषताओं में से एक है।
असदुद्दीन ओवैसी का बयान अदालत के एक आयुक्त के वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद में अदालत के आदेश के अनुसार परिसर का सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी करने के एक दिन बाद आया है।
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने वाली टीम
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ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी में दर्शन पूजन करने के लिए वाद दाखिल करने वाली महिलाओं के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने बताया कि शुक्रवार को शुरू हुआ सर्वे का काम रविवार तक पूरा होने की संभावना है। बताया कि खसरा नंबर 9130 के सर्वे के हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं। इस आदेश में पूरे खसरे के सर्वे का आदेश है, जिसमें संपूर्ण ज्ञानवापी मस्जिद परिसर और शृंगार गौरी समाहित हैं।
ऐसे में इतने बड़े क्षेत्र के सर्वे में तीन दिन का समय लग सकता है। अदालत में मुकदमा दाखिल करने वाली महिलाओं सीता साहू, मंजू व्यास, राखी सिंह के अनुसार वर्ष 1992 तक मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति थी। महिलाओं ने पुलिस के अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। सर्वे को देखते हुए वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के 10 थानों की फोर्स और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को अतिरिक्त सतर्कता के साथ माहौल पर नजर रखने के लिए कहा है।
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के पहले दिन मां शृंगार गौरी की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई। सर्वे करने के बाद लौटे अधिवक्ताओं ने बताया कि पहले दिन मस्जिद परिसर में लगी बैरिकेडिंग के अंदर जाने से हमें दूसरे पक्ष ने रोका। वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर शनिवार की शाम को तीन बजे दोबारा सर्वे के लिए बैरिकेडिंग के अंदर जाएंगे। उन्होंने कोर्ट के आदेश के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को स्थिति से अवगत करा दिया है।
शुक्रवार को कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने परिसर का सर्वे किया। वादी पक्ष के अधिवक्ता सुभाषनंदन चतुर्वेदी ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा ज्ञानवापी परिसर में सर्वे और वीडियोग्राफी का कार्य किया गया। इसमें शृंगार गौरी का सर्वे और वीडियोग्राफी पूरी करवा ली गई है।
कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने बैरिकेडिंग के अंदर नहीं जाने दिया और हमें मना कर दिया। ऐसे में हम वापस लौट आए हैं। कोर्ट कमिश्नर ने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट से बात की है। प्रतिवादी पक्ष सर्वे को लटकाना चाहते हैं।