अधिशासी अभियंता संजय गोरे ने बताया कि जब डीपीआर तैयार किया गया था, तो उस समय मौके पर पुराने भवन थे। इन्हें हटाने के बाद वैदिक विज्ञान केंद्र के निर्माण स्थल पर कई छोटे-छोटे मंदिर मिले हैं। वहां निर्माण संभव नहीं है, इसलिए डिजाइन में बदलाव किया गया है।