पीएसपी कंपनी और मंदिर प्रशासन मनमानी और लापरवाही कर रहा है। मंदिर प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने जिस बात को लेकर सुंदरीकरण के लिए लिखित अग्रीमेंट किया था उससे मुकर गए है। उन्होंने सभी विग्रहों को यथास्थान करने का लिखित आश्वासन दिया था पर अब बात मानने को अधिकारी तैयार नहीं है।
महंत परिवार ने मांग करते कहा कि अगर हनुमान जी का विग्रह यथास्थान विराजमान नहीं किया गया तो महंत परिवार आत्महत्या करने को बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी कार्यरत पीएसपी कंपनी के जीएम और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की होगी। इससे पूर्व भी पीएसपी कंपनी और मंदिर प्रशासन ने मनमानी करते हुए अक्षयवट वृक्ष को ढहा दिया था, मंदिरों के छत हटाने के दौरान कल्कि भगवान, ललिता गौरी सहित कई शिवलिंग भी खंडित हो गए थे।