काशी उत्सव में मनोज तिवारी
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जनता की मांग पर उन्होंने अपना पुराना अंदाज भी दिखाया और चट देनी मार दे ली खींच के तमाचा, ही ही ही हंस देलीं रिंकिया के पापा...की धुन जब गुनगुनाई तो दर्शकों ने भी उनके सुर से सुर मिलाना शुरू कर दिया।
ए दरभंगिया भऊजी अपने बहिनी से ब्याह करा दा ना....के बाद मनोज ने जिया हो बिहार के लाला...सुनाया तो पूरे रुद्राक्ष में खूब तालियां बजीं और लोग झूमकर नाच उठे। लोगों ने खूब हो हल्ला मचाना शुरू किया तो इस पर मनोज तिवारी को कहना पड़ा कि थोड़ा कम हल्ला मचावा जा।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय काशी उत्सव में अव्यवस्थाओं की भरमार रही। रुद्राक्ष की क्षमता से पांच से छह गुना पास बांट दिए गए। वहीं देर शाम को कार्यक्रम देखने के लिए वीआईपी पास लेकर पहुंचे दर्शकों को निराश होकर लौटना पड़ा।
कार्यक्रम शुरू होने के घंटा भर पहले ही पूरा हाल दर्शकों से भर गया था। इसके बाद भी बाहर सड़क पर पास धारियों की कतार लगी हुई थी। आयोजकों ने भीड़ का दबाव देखते हुए घंटा भर पहले ही रुद्राक्ष के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया।