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Kashi Tamil Sangmam: बनारसी साड़ी क्यों है दक्षिण भारत के पर्यटकों की पहली पसंद, अध्यात्म से क्या है जुड़ाव ?

Sat, 19 Nov 2022 11:51 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

तमिल संगमम दो राज्यों के नागरिकों के मिलन का नहीं दो संस्कृतियों के धार्मिक और खानपान का सम्मेलन है। कांजीवरम और बनारस साड़ी का अटूट संबंध है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में बनने वाली साड़ी की विशेषता मुगल प्रेरित डिजाइन है। डिजाइन के बावजूद इस साड़ी का वजन काफी कम होता है। बनारसी साड़ी भी बुनाई और जरी के काम के बाद भी हल्की होती है। 
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बनारसी साड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दक्षिण के पर्यटकों में बनारसी साड़ी का काफी क्रेज रहता है। तमिल संगमम में आ रहे पर्यटकों के स्वागत में दशाश्वमेध से शिवाला तक बाजार सज गए हैं। दुकानदार शिवेश ने बताया कि तमिल संगमम बनारसी साड़ी और कांजीवरम साड़ी के धागे बनारस और तमिलनाडु के रिश्ते को मजबूत करेंगे। तमिल संगमम दो राज्यों के नागरिकों के मिलन का नहीं दो संस्कृतियों के धार्मिक और खानपान का सम्मेलन है। कांजीवरम और बनारस साड़ी का अटूट संबंध है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में बनने वाली साड़ी की विशेषता मुगल प्रेरित डिजाइन है। डिजाइन के बावजूद इस साड़ी का वजन काफी कम होता है। बनारसी साड़ी भी बुनाई और जरी के काम के बाद भी हल्की होती है। 

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 शैव धर्म में शिव की प्रधानता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ शैव धर्म के मानने वाले वालों के लिए विशेष है। प्रति वर्ष लाखों की संख्या में दक्षिण भारतीय पर्यटक काशी की यात्रा पर आते हैं। पर्यटक बनारसी साड़ी को प्रसाद के तौर पर ले जाते हैं।  

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