अवैध निर्माण लील रहे पौराणिक महत्व के तालाब
तालाबों के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट से सरकार तक के निर्देश हैं, लेकिन प्रशासन इसके बावजूद गंभीरता नहीं बरत रहा है। परिक्रमा पथ के अंतिम यानी पांचवें पड़ाव के सफर में तीन पौराणिक तालाब हैं। सोना तालाब, सारंगनाथ तालाब और कपिलधारा तालाब। राह की दुश्वारियों से कहीं अधिक तकलीफ तीर्थयात्रियों को तीर्थ पथ के उन पौराणिक तालाबों की हालत देखकर होगी, जिनमें स्नान और आचमन का माहात्म्य पंचक्रोशी यात्रा में वर्णित है।
बरसात के कारण सारंग तालाब में पानी तो भर गया है लेकिन किनारे-किनारे गंदगी डालकर तालाब पाटने का काम बदस्तूर जारी है। सोना तालाब तो अब बस अंतिम सांसें ही गिन रहा है। ऐसी स्थिति में तीर्थ यात्री इन पौराणिक तालाबों में आचमन और स्नान नहीं, सिर्फ दर्शन ही कर पाएंगे। कपिलधारा तालाब की स्थिति कुछ बेहतर है लेकिन पानी नहीं बदलने से उसका रंग भी हरा हो चुका है। गंदगी के चलते पानी आचमन के योग्य नहीं है।
कपिलधारा का माहात्म्य शिव गया के समान
वृषभध्वजेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी महेंद्र गिरी ने बताया कि कपिलधारा का माहात्म्य शिव गया के समान है। यहां स्थित कपिलधारा तालाब में स्नान-आचमन का वही पुण्य-फल है जो फल्गु नदी का है। यहां श्रद्धालु अपने पितरों को तारने के लिए बालू के पिंड का दान करते हैं। पंचक्रोशी परिक्रमा का यह पांचवां पड़ाव है और यहां पर विश्राम करने के बाद तीर्थयात्री अपनी मनोकामना की पूर्ति करते हैं।