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काशी पंचक्रोशी यात्रा: पौराणिक महत्व के सारंग और सोना तालाब लड़ रहे अस्तित्व की जंग

Mon, 21 Sep 2020 05:12 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पंचक्रोशी के पांचवे पड़ाव कपिल धारा धाम। - फोटो : अमर उजाला
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काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा पथ के पहले पड़ाव से लेकर अंतिम पड़ाव तक तीर्थयात्रियों की दुश्वारियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। पांचों पांडव मंदिर से कपिलधारा तक की 11 किमी लंबी सड़क और उसकी पटरियां बनने के साथ ही टूटने भी लगी हैं। कई जगह तो सड़क पर ही पटरियों के पत्थर रखकर छोड़ दिए गए हैं। 

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रविवार को पंचक्रोशी परिक्रमा के अंतिम पड़ाव की पड़ताल के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं। पांडेयपुर से तीर्थ पथ की पटरियों पर पत्थर लगाने का काम शुरू किया गया है। जगह-जगह पत्थर या तो टूट चुके हैं या फिर कई जगह तो लगाए ही नहीं गए हैं। कार्यदायी संस्था ने सड़क के किनारे ही पत्थरों को छोड़ दिया है। वहीं पांडेयपुर से थोड़ा आगे बढ़ते ही गहरा नाला पिछले एक महीने से खोलकर छोड़ा गया है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन इसमें कोई न कोई मवेशी गिरकर घायल होता है। परिक्रमा पथ पर कई जगह तबेले भी संचालित किए जा रहे हैं। कपिलधारा में धर्मशालाओं की भी स्थिति बदहाल ही है। कहीं कब्जे हैं, धर्मशालाएं क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं पेयजल-प्रकाश और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं।

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अवैध निर्माण लील रहे पौराणिक महत्व के तालाब 
तालाबों के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट से सरकार तक के निर्देश हैं, लेकिन प्रशासन इसके बावजूद गंभीरता नहीं बरत रहा है। परिक्रमा पथ के अंतिम यानी पांचवें पड़ाव के सफर में तीन पौराणिक तालाब हैं। सोना तालाब, सारंगनाथ तालाब और कपिलधारा तालाब। राह की दुश्वारियों से कहीं अधिक तकलीफ तीर्थयात्रियों को तीर्थ पथ के उन पौराणिक तालाबों की हालत देखकर होगी, जिनमें स्नान और आचमन का माहात्म्य पंचक्रोशी यात्रा में वर्णित है।

बरसात के कारण सारंग तालाब में पानी तो भर गया है लेकिन किनारे-किनारे गंदगी डालकर तालाब पाटने का काम बदस्तूर जारी है। सोना तालाब तो अब बस अंतिम सांसें ही गिन रहा है। ऐसी स्थिति में तीर्थ यात्री इन पौराणिक तालाबों में आचमन और स्नान नहीं, सिर्फ दर्शन ही कर पाएंगे। कपिलधारा तालाब की स्थिति कुछ बेहतर है लेकिन पानी नहीं बदलने से उसका रंग भी हरा हो चुका है। गंदगी के चलते पानी आचमन के योग्य नहीं है।
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कपिलधारा का माहात्म्य शिव गया के समान
वृषभध्वजेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी महेंद्र गिरी ने बताया कि कपिलधारा का माहात्म्य शिव गया के समान है। यहां स्थित कपिलधारा तालाब में स्नान-आचमन का वही पुण्य-फल है जो फल्गु नदी का है। यहां श्रद्धालु अपने पितरों को तारने के लिए बालू के पिंड का दान करते हैं। पंचक्रोशी परिक्रमा का यह पांचवां पड़ाव है और यहां पर विश्राम करने के बाद तीर्थयात्री अपनी मनोकामना की पूर्ति करते हैं।
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