अब जब कोरोना का असर कम हुआ है और प्रतिबंधों में छूट मिली है तो आठ नवंबर को गंगा की मध्यधारा पर यह अनूठी कृष्ण लीला देश-दुनिया के पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए यादगार होगी। वाराणसी में ये परंपरा 450 वर्ष से अधिक पुरानी है जो कि कार्तिक मास की नाग चतुर्थी को हर साल यहां होती है। नाग नथैया का ये मेला गोस्वामी तुलसी दास जी के द्वारा शुरू किया गया था, तभी से ये लीला तुलसी घाट पर होती चली आ रही है।