अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिन महिलाएं करवाचौथ का व्रत रखेंगी। चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी में करवाचौथ का व्रत व अनुष्ठान होगा। व्रत रखने के साथ ही सुहागिन महिलाएं देवाधिदेव महादेव, माता पार्वती, भगवान श्रीगणेश, एवं श्रीकार्तिकेय जी की पूजा अर्चना करतीं हैं। रात्रि में चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर चंद्रमा को चलनी से देखकर उनकी आरती उतारी जाती है।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि करवाचौथ का व्रत 13 अक्तूबर को रखा जाएगा। करवाचौथ की पूजा चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि में की जाती है। कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि 12 अक्तूबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात दो बजे लगेगी और 13 अक्तूबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात 3:09 बजे तक रहेगी। करक चतुर्थी (करवा चौथ) का व्रत निराहार व निराजल रहते हुए 13 अक्तूबर को रखा जाएगा। चंद्रोदय रात 7:55 बजे होगा।