पहले तो इस तरह की धमकी को कारोबारी ने हल्के में लिया लेकिन बाद में उक्त बदमाश के बारे में जानकारी जुटाई तो कारोबारी को पता लगा कि यह तो दो लाख का इनामी कुख्यात अपराधी है। 19 मई की रात कारोबारी की तहरीर के आधार पर कपसेठी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमे में रंगदारी मांगने से संबंधित धारा की जगह सात और दो वर्ष की सजा वाले अपराध से संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि कारोबारी की ओर से पहले जो तहरीर मिली थी उसके आधार पर ही धाराएं लगाई गईं। बाद में जब कारोबारी का बयान दर्ज हुआ तो धाराएं बढ़ा दी गईं। बदमाश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 386 के तहत ही कार्रवाई होगी। वहीं कारोबारी की सुरक्षा बढ़ाते हुए अपराधी की तलाश में भी टीमें लगी हुई हैं।
कचहरी में फौजदारी के अधिवक्ता अनुज यादव व विकास सिंह ने बताया कि कपसेठी थाने की पुलिस इस प्रकरण में सीधे तौर पर रंगदारी का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। एक इनामी बदमाश द्वारा किसी व्यक्ति से 10 लाख रुपये रंगदारी की मांग की जाती है और पुलिस द्वारा उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 386 के तहत मुकदमा दर्ज न करके धारा 506 व 507 में मुकदमा दर्ज करना अत्यंत ही हास्यास्पद और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला है।
इससे तो साफ तौर पर प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपित को बचाने के फिराक में लगी है। उसके खिलाफ हल्के धाराओं में मुकदमा दर्ज कर केवल कोरम पूरा किया गया, जिससे उसे आसानी से कोर्ट से जमानत मिल जाए और वह फिर से अपनी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सके।