विरोध करने पर अमित, अमन और रजनीश समेत अज्ञात ने मुकेश की पिटाई की और पिता का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। मां के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। आरोपियों ने गालीगलौज की। परिवार को इतनी ठेस पहुंची कि वह बिना दर्शन किए लौट गए। कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
नेमी श्रद्धालुओं ने बताया कि मंगलवार और रविवार को इतनी भीड़ होती है कि बाहर तक लाइन लगती है। बैरिकेडिंग जब मन चाहे होगी और हट जाती है। यह कौन करता है, यह भी किसी को नहीं पता। माला-फूल की बिक्री करने वालों ने श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देख बाहरी युवकों की फौज तैयार कर रखी है। झाड़ फूंक और हाथ में गंडा बांधने वाले भी मंदिर परिसर में बढ़ गए हैं। इनका कोई सत्यापन तक नहीं है।
लोगों ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि सेवा करने वालों को आईकार्ड जारी किए जाए। मंदिर परिसर में आवाजाही की अनुमति मिले। माला-फूल, झाड़ फूंक करने वालों के भी आई कार्ड बनाए जाएं। तभी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ अराजकता पर लगाम लग सकती है।
मंदिर के निकास द्वार पर खड़े होकर दुकानों से माला-प्रसाद लेने वालों को प्रवेश कराते हैं। निकास द्वार को मनमाने ढंग से बंद किया जाता है। लोगों का आरोप है कि मंदिर के बाहर कुछ युवक अकसर दर्शनार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं और व्यवस्था के नाम पर दबाव बनाते हैं।