पांडेयपुर चौराहे के समीप प्रदूषण। (फाइल फोटो)
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आने वाले दिनों में शहर की आबोहवा बदलने वाली है। नगर निगम के 15वें वित्त की हुई बैठक में शहर के प्रदूषण को दूर करने पर जोर दिया गया। महापौर मृदुला जायसवाल ने कहा कि 101 करोड़ रुपये से शहर की समस्याएं दूर कराई जाएंगी। शहर के प्रदूषण, सीवर, सड़क, तालाब आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी। इसके लिए अलग-अलग विभागों को काम और धनराशि जारी कर दी गई है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स के लिए 6.73 करोड़
मंगलवार को अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महापौर ने कहा कि एयर क्वालिटी इंडेक्स के लिए 6 करोड़ 73 लाख रुपये दिया गया है। सिटी कमांड सेंटर के पास कंट्रोल ऑफिस बनेगा। इसी प्रकार सड़कों के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। पांचों जोन में नाली खड़ंजा बनाने के लिए तीन करोड़ 86 लाख रुपये दिया गया है। वाटर स्प्रिंकलर के लिए एक करोड़, रोड स्वीपिंग मशीन के लिए 1.80 करोड़, पौधरोपण के लिए 2 करोड़ 77 लाख रुपये जारी किया गया है।
फव्वारे एक करोड़ रुपये से लगाए जाएंगे
महापौर मृदुला जायसवाल ने कहा कि मियावाकी पद्धति पर उद्यान का विकास किया जाएगा। फव्वारे एक करोड़ रुपये से लगाए जाएंगे। इस काम में बीएचयू की भी मदद ली जाएगी। उन्हें 40 लाख रुपये दिए गए हैं। ताकि वे प्रदूषण के लिहाज से इस का निरीक्षण कर सकें। इसके अलावा कूड़ा प्रबंधन के लिए वाहन खरीदे जाएंगे। पुराने वाहन नगर निगम सीमा में शामिल गांव में चले जाएंगे। जबकि नए वाहन शहर में काम करेंगे। वहीं करसड़ा प्लांट को चलाने के लिए 13 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जलापूर्ति के लिए 14 करोड़ 17 लाख रुपये जारी किया गया है।
ये है मियावाकी पद्धति
जापानी वनस्पति विज्ञानी डॉ. मियावाकी ने पौधरोपण की इस पद्धति को विकसित किया है। इस विधि से कम जगह और कम समय में अधिक घनत्व वाले जंगल तैयार किए जा सकते हैं। पद्धति के अनुसार, पहले स्थानीय पौधों की सूची तैयार की जाती है।
रोपण में प्रजाति का चयन इस तरह किया जाता है कि कम रोशनी में तैयार होने वाली कम ऊंचाई की प्रजाति, मध्यम रोशनी में बढ़ने वाली मध्यम ऊंचाई की प्रजाति और ज्यादा रोशनी में जीने वाले ऊंची प्रजाति के पौधे रोपे जात हैं।
एक हेक्टेअर में होते हैं लगभग 30 हजार पौधे
आमतौर पर एक हेक्टेयर में 1100 पौधे लगते हैं, वहीं मियावाकी पद्धति से एक हेक्टेअर में लगभग 30 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। हाई डेंसिटी प्लांटेशन से बहुत कम समय में प्राकृतिक जंगल लहलहा उठता है। यह बनारस की बिगड़ती हवा को सुधारने में बेहद मददगार होगा। साथ ही जल, मृदा संरक्षण और पक्षियों के वास स्थल के संरक्षण में भी यह मददगार रहेगा।