फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Water Crisis: मटमैले पानी से बचाव के लिए जलकल ने बढ़ाई डोजिंग क्षमता, बाढ़ की समस्या से निबटने की तैयारी

Thu, 18 Jul 2024 02:56 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: बारिश और बाढ़ को लेकर आने वाली समस्याओं को लेकर जलकल विभाग की तैयारियां तेज हो गई हैं। मटमैले पानी की समस्या का समाधान करना चुनौतीपूर्ण होता है। खासतौर से तब जब बारिश का मौसम हो।
विज्ञापन
नटिनियादाई में पाइप लाइन खराब होने से सड़क की हुई दुर्दशा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बारिश और बाढ़ के समय शहर में मटमैले पानी की समस्या बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जलकल ने पूरी तैयारी कर ली है। मटमैले पानी को शुद्ध करना भी जलकल के लिए चुनौती होती है। ऐसी स्थिति में जलकल ने डोजिंग क्षमता बढ़ाई है।

विज्ञापन


गंगा से पानी लेकर उसे शोधित करने के बाद घरों में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। डोजिंग बढ़ाने से पानी में मिट्टी, बालू के कण के साथ बैक्टीरिया भी साफ हो जाते हैं। इससे पानी का टीडीएस 200 से कम होता है। जो पीने योग्य अच्छा पानी माना जाता है। डोजिंग बढ़ाने से पानी की गुणवत्ता बरकरार रहती है। भदैनी स्थित पंप के जरिये गंगा का पानी लेकर उसे भेलूपुर जलकल परिसर में शोधित करने के बाद इसकी आपूर्ति की जा रही है।

शहर के नगवा वार्ड के अंदर संगमपुरी कॉलोनी में बाढ़ के समय मटमैला पानी आता था। अभी पानी ठीक आ रहा है। इसी प्रकार सरैया वार्ड गंगा और वरुणा नदी दोनों के इलाके में पड़ता है। जब दोनों नदियों में बाढ़ आती है तो इस वार्ड को दोनों नदियां अपने आगोश में लेती हैं और इस वार्ड में मटमैला पानी आता है।

विज्ञापन

पानी के शोधन के लिए होता आर्गेनिक पॉलिमर का इस्तेमाल
पानी के शोधन के लिए ऑर्गेनिक पॉलिमर का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे पीपीएम शून्य के करीब हो जाता है। इससे पानी में घुलनशील अशुद्धियों ऑर्गेनिक कंपाउंड, बैक्टीरिया, मिट्टी, बालू के कण आदि लगभग पूरी तरह साफ हो जाते हैं। इससे पानी मटमैला या गंदा नहीं दिखता। डोजिंग की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसके इस्तेमाल से पानी के मूल गुण व हेल्दी मिनरल्स पानी में ही मौजूद रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

1892 के शोधित प्लांट से होती जलापूर्ति
जलकल का भेलूपुर स्थित शोधित प्लांट का निर्माण 1892 की है। तभी की पाइप लाइनों से पानी की आपूर्ति हो रही है। इस दौरान कुछ नई पाइप लाइन डाली गई है। इन पाइपलाइनों में लीकेज के चलते न केवल पानी बर्बाद होता है बल्कि मटमैला पानी आने की समस्या होती है। इसे लेकर जलकल की ओर से वार्डों में लीकेज दुरुस्त करने का काम कराया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए।
विज्ञापन

एक नजर में आंकड़े
  • 20 लाख आबादी को होती पानी की आपूर्ति
  • 276 एमएलडी डिमांड
  • 330 एमएलडी उत्पादन
  • 205 एमएलडी भूगर्भ जल
  • 125 एमएलडी गंगा से
  • 114 ट्यूबवेल से 190 एमएलडी पानी
  • 86 मिनी ट्यूबवेल से 15 एमएलडी पानी
  • 1500 किमी पानी की पाइप लाइन
  • 1.83 लाख पानी के कनेक्शन

बोले अधिकारी
बारिश और बाढ़ के समय मटमैला पानी आता है। जिसे शोधित करने के बाद शहर की जनता को जलापूर्ति की जा रही है। इस समय डोजिंग की क्षमता बढ़ा दी गई है, ताकि मटमैले पानी की आपूर्ति हो। - विजय नारायण मौर्य, महाप्रबंधक जलकल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें