पानी के शोधन के लिए होता आर्गेनिक पॉलिमर का इस्तेमाल
पानी के शोधन के लिए ऑर्गेनिक पॉलिमर का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे पीपीएम शून्य के करीब हो जाता है। इससे पानी में घुलनशील अशुद्धियों ऑर्गेनिक कंपाउंड, बैक्टीरिया, मिट्टी, बालू के कण आदि लगभग पूरी तरह साफ हो जाते हैं। इससे पानी मटमैला या गंदा नहीं दिखता। डोजिंग की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसके इस्तेमाल से पानी के मूल गुण व हेल्दी मिनरल्स पानी में ही मौजूद रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
1892 के शोधित प्लांट से होती जलापूर्ति
जलकल का भेलूपुर स्थित शोधित प्लांट का निर्माण 1892 की है। तभी की पाइप लाइनों से पानी की आपूर्ति हो रही है। इस दौरान कुछ नई पाइप लाइन डाली गई है। इन पाइपलाइनों में लीकेज के चलते न केवल पानी बर्बाद होता है बल्कि मटमैला पानी आने की समस्या होती है। इसे लेकर जलकल की ओर से वार्डों में लीकेज दुरुस्त करने का काम कराया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए।
एक नजर में आंकड़े
- 20 लाख आबादी को होती पानी की आपूर्ति
- 276 एमएलडी डिमांड
- 330 एमएलडी उत्पादन
- 205 एमएलडी भूगर्भ जल
- 125 एमएलडी गंगा से
- 114 ट्यूबवेल से 190 एमएलडी पानी
- 86 मिनी ट्यूबवेल से 15 एमएलडी पानी
- 1500 किमी पानी की पाइप लाइन
- 1.83 लाख पानी के कनेक्शन
बोले अधिकारी
बारिश और बाढ़ के समय मटमैला पानी आता है। जिसे शोधित करने के बाद शहर की जनता को जलापूर्ति की जा रही है। इस समय डोजिंग की क्षमता बढ़ा दी गई है, ताकि मटमैले पानी की आपूर्ति हो। - विजय नारायण मौर्य, महाप्रबंधक जलकल