बीएचयू में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भेदभाव का मुद्दा शिक्षकों ने उठाया है। इसको लेकर कुलपति और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में विश्वविद्यालय के विभागों में हर पद के लिए अलग-अलग प्रकार के मापदंड बनाने का आरोप लगाते हुए नियमानुसार नियुक्ति की मांग की गई है।
शिक्षकों ने कुलपति, पिछड़ा वर्ग आयोग को भेजे पत्र में बताया है कि कुछ विभागों में शॉर्टलिस्टिंग में योग्य पाए जाने के बाद भी अभ्यर्थियों को एकल योग्य अभ्यर्थी बताकर साक्षात्कार से वंचित किया जा रहा है, जबकि कुछ विभागों में साक्षात्कार किए जा रहे हैं। इस तरह का विरोधाभास बीएचयू द्वारा बनाए गए नियमों के विपरीत है। एकल योग्य आवेदन करने वाले अभ्यर्थी को भी चयन का अवसर दिया जाना चाहिए।
बताया कि कुछ दिन पहले ही संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के धर्मागम विभाग में एकमात्र योग्य ओबीसी अभ्यर्थी मिलने पर भी साक्षात्कार संपन्न किया गया था जबकि कृषि विज्ञान के संस्थान के कई विभागों में भी न केवल ऐसे अभ्यर्थियों के साक्षात्कार लिए गए बल्कि उनका चयन भी किया गया। शिक्षकों ने यह भी कहा है कि आईएमएस बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद के लिए शॉर्टलिस्टिंग में अकेले योग्य पाए गए अभ्यर्थियों का इंटरव्यू हो सकता है तो अन्य विभागों और संकायों में क्यों नही। उन्होंने कुलपति से इस तरह के विरोधाभासी फैसले को वापस लेने की मांग की है।