योग किसी धर्म विशेष से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह एक भारतीय विज्ञान है और विज्ञान उस बहती धारा के समान है जो सभी जीवों को ऑक्सीजन के लिए बराबर अवसर देता है। उक्त बातें भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के विशेष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ और अंतर विश्वविद्यालय योग विज्ञान केंद्र बंगलूरू द्वारा आयोजित योग एंड मेंटल हेल्थ नामक विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में कहीं।
उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति की यह विशेषता रही है कि हम बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान सहजता से निकाल लेते हैं जिसमें भारतीय दर्शन और योग ने बड़ी भूमिका रही है। योग केवल मन और शरीर के साधने की ही बात नहीं करता अपितु प्रकृति संरक्षण की बात भी करता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंतर विश्वविद्यालय योग विज्ञान केंद्र बंगलूरू के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय रहे। अध्यक्षता केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने की।