स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण(एनएचएफएस ) कराया जाता है। इसमें प्रजनन क्षमता, शिशु और बाल मृत्यु दर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, बालक-बालिका दर सहित कई बिंदुओं पर सर्वेक्षण कर रिपोर्ट मंत्रालय को दी जाती है। मंत्रालय की ओर से इसको पोर्टल पर भी अपलोड किया जाता है। पिछले दो सर्वे में अगर 1000 बालक के अनुसार बालिकाओं के आंकड़े को देखा जाए तो 2015-16 और 2019-21 में हुए सर्वे में संख्या प्रति एक हजार बालक पर 951 बालिकाएं हैं। इस बार भी संख्या बराबरी पर पहुंच गई है।
एनएफएचएस में 1000 बालक पर बालिका जन्म
| |
2015-16 |
2019-21 |
| भारत |
991 |
1020 |
| उत्तर प्रदेश |
995 |
1017 |
| वाराणसी |
951 |
951 |
वाराणसी का जन्म दर
| वर्ष |
लड़का |
लड़की |
| 2021 |
27967 |
25383 |
| 2022 |
31591 |
28723 |
| 2023 |
29963 |
29963 |
बेटियों का जन्मदर बराबर होना एक सुखद संकेत हैं। निश्चित तौर पर बेटी बचाओं के उद्देश्य से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में लोग जागरूक हुए हैं और उसका लाभ भी ले रहे हैं। हर साल जन्म लेने वाले बच्चों (बेटे-बेटी) का रिकार्ड एचएमआईएस पोर्टल पर भी अपलोड कराया जाता है। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ
कुश्ती में नाम कर रही आंचल और रिया यादव
कुश्ती के प्रति बालिकाओं (खिलाड़ियों) की रूची बढ़ी है। सुविधाएं बढने की वजह से बेटियां खेल में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। काशी की आंचल यादव साई के निवेदिता छात्रावास में जबकि रिया लालपुर स्टेडियम में कुश्ती में पदक हासिल कर रही है। आंचल यादव ने वर्ष 2022 में फेडरेशन कप हरियाणा में प्रतिभाग किया और राज्यस्तरीय स्कूली गेम मुजफ्फरनगर में रजत पदक जीता।
इसके अलावा अंडर-15 स्टेट गोरखपुर में ब्रांच मेडल जीता है। फिलहाल साई के खेल छात्रावास में प्रशिक्षण ले रही है। पूर्वांचल ग्रेपलिंग केमेटी के अध्यक्ष व कुश्ती संघ के गोरख यादव ने बताया कि रिया यादव का चयन मार्च माह में दिल्ली में आयोजित होने वाली ग्रेपलिंग प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इससे पहले रिया कई राज्य स्तरीय व स्कूली खेलों में प्रतिभाग कर चुकी हैं।