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बालिका दिवस पर विशेष: काशी में बेटों के बराबर पहुंची बेटियां, बनाया रिकॉर्ड; हर दिन हासिल कर रहीं नया मुकाम

Wed, 24 Jan 2024 01:29 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, रबीश श्रीवास्तव, वाराणसी

सार

एचएमआईएस पोर्टल पर दर्ज हुए आंकड़े के मुताबिक काशी में बेटों के बराबर बेटियां पहुंच गई हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड हैं। यहां बेटी बचाओ के लिए कई योजनाएं चल रही हैं।यहां नौ महीने में 29963 बेटियों का जन्म हुआ। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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जमीन से लेकर आसमान तक हर जगह बेटियों का वर्चस्व है। शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सेना, समाज सेवा से लेकर सरकारी कार्यालयों में कामकाज से लेकर समाज के हर क्षेत्र में बेटियां बेटों से बराबरी कर रही हैं। वह अपने प्रदर्शन से न केवल दिन प्रतिदिन नया मुकाम हासिल कर रही है बल्कि उस मिथक को भी तोड़ रही है, जिसमें लोग बेटियों को कम आंकने जैसी चर्चाएं करते हैं। काशी में अगर जन्मदर की बात करें तो इस साल बेटियां बेटों के बराबरी पर पहुंच गई हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड हैं।
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उद्देश्य से हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। सरकार की ओर से भी जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बालिका समृद्धि योजना, कन्या सुमंगला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना सहित कई योजनाएं चलाई जा रही है। अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए शहर से लेकर गांव तक अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक भी किया जा रहा है। 

निश्चित तौर पर लोगों का विश्वास इस ओर बढ़ रहा है। इसका प्रमाण स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के पोर्टल पर जिले में बालक-बालिका जन्म दर को लेकर दर्ज आंकड़ों में भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन सत्र के आंकड़ों पर गौर करे तो सत्र 2023-24 में में बेटा और बेटी बराबरी पर पहुंच गई है। इस सत्र(अप्रैल से मार्च 2024 तक) में अब तक नौ महीने में दिसंबर 2023 तक 29963 बेटों का जन्म हुआ जबकि इतनी ही संख्या बेटियों की भी हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वेक्षण में भी बराबर आ चुकी है रिपोर्टर

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण(एनएचएफएस ) कराया जाता है। इसमें प्रजनन क्षमता, शिशु और बाल मृत्यु दर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, बालक-बालिका दर सहित कई बिंदुओं पर सर्वेक्षण कर रिपोर्ट मंत्रालय को दी जाती है। मंत्रालय की ओर से इसको पोर्टल पर भी अपलोड किया जाता है। पिछले दो सर्वे में अगर 1000 बालक के अनुसार बालिकाओं के आंकड़े को देखा जाए तो 2015-16 और 2019-21 में हुए सर्वे में संख्या प्रति एक हजार बालक पर 951 बालिकाएं हैं। इस बार भी संख्या बराबरी पर पहुंच गई है।

एनएफएचएस में 1000 बालक पर बालिका जन्म
  2015-16 2019-21
भारत 991 1020
उत्तर प्रदेश 995 1017
वाराणसी 951 951

वाराणसी का जन्म दर
वर्ष लड़का   लड़की
2021     27967     25383
2022     31591     28723
2023     29963     29963
 
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क्या कहते हैं अधिकारी

बेटियों का जन्मदर बराबर होना एक सुखद संकेत हैं। निश्चित तौर पर बेटी बचाओं के उद्देश्य से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में लोग जागरूक हुए हैं और उसका लाभ भी ले रहे हैं। हर साल जन्म लेने वाले बच्चों (बेटे-बेटी) का रिकार्ड एचएमआईएस पोर्टल पर भी अपलोड कराया जाता है। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

कुश्ती में नाम कर रही आंचल और रिया यादव
कुश्ती के प्रति बालिकाओं (खिलाड़ियों) की रूची बढ़ी है। सुविधाएं बढने की वजह से बेटियां खेल में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। काशी की आंचल यादव साई के निवेदिता छात्रावास में जबकि रिया लालपुर स्टेडियम में कुश्ती में पदक हासिल कर रही है। आंचल यादव ने वर्ष 2022 में फेडरेशन कप हरियाणा में प्रतिभाग किया और राज्यस्तरीय स्कूली गेम मुजफ्फरनगर में रजत पदक जीता।

इसके अलावा अंडर-15 स्टेट गोरखपुर में ब्रांच मेडल जीता है। फिलहाल साई के खेल छात्रावास में प्रशिक्षण ले रही है। पूर्वांचल ग्रेपलिंग केमेटी के अध्यक्ष व कुश्ती संघ के गोरख यादव ने बताया कि रिया यादव का चयन मार्च माह में दिल्ली में आयोजित होने वाली ग्रेपलिंग प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इससे पहले रिया कई राज्य स्तरीय व स्कूली खेलों में प्रतिभाग कर चुकी हैं।
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