सामाजिक कार्यकर्ता नजमा परवीन ने कहा कि हमें कट्टरपंथी मौलानाओं के बहकावे में न आकर रसूल के रास्ते पर चलना है। हिजाब के चक्कर मे फंसाकर मौलाना मुस्लिम बेटियों को घर में बंद करना चाहते हैं। मुस्लिम महिलाओं को आज तक धर्म का हवाला देकर तालीम से दूर रखा गया।
मुस्लिम महिलाएं दुनियां की सबसे अधिक अधिकार विहीन महिलाएं हैं। हमें हिजाब नहीं, किताब चाहिए। जो न पढ़ सकी, वो अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाएं और आगे बढ़ाएं। परवीन ने बताया कि पहले अधिवेशन 2013 में पराड़कर भवन में हुआ था, इसमें तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन पूरे देश में गया और संसद से कानून पारित हुआ।
इंद्रेश कुमार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप जलाकर अधिवेशन का शुभारंभ किया। मौके पर मदीना, शाहजहां, नसीबुन्निशा, सायरा, मजीदून, रेहाना, जमीलून, रजिया, तबस्सुम, नूरजहां, शकीला, रेशमा, जीनत आदि मुस्लिम महिलाएं उपस्थित रहीं।