16 हजार टन जलाई जाती है लकड़ी
सर्वे के अनुसार, शवदाह के लिए एक साल में करीब 16 हजार टन लकड़ी जलाई जाती है। इससे 77 किग्रा नाइट्रोजन, 48 हजार किग्रा फ ास्फ ोरस और पांच हजार किलोग्राम पोटैशियम पानी में घुल जाता है। इससे बीओडी (बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) तेजी से बढ़ रही है। नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी कहते हैं कि गंगा में लाश व अधजले शवों को फेंका जाना बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
हो सकती हैं बीमारियां
नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी के मुताबिक, गंगा में राख के अलावा अधजले शवों व लाशों के फेंके जाने से स्नान करने वालों को चर्म रोग, पीलिया, कैंसर, डायरिया और हैजा जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
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