वाराणसी। उफनाई गंगा रविवार की रात तटीय मंदिरों में घुसने लगी। ललिता घाट पर शेषशाई विष्णु का मंदिर डूब गया। दशाश्वमेध घाट स्थित ब्रह्मेश्वर और शूलटंकेश्वर मंदिरों में भी गंगा प्रवेश कर गई। कई भवनों के भूतल पर गंगा के पहुंचने से हड़कंप मच गया। आरती ऊपर की सीढि़यों पर करनी पड़ी। रात नौ बजे तक जलस्तर 65.53 मीटर पर पहुंच गया था। मणिकर्णिका श्मशान घाट और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह अब ऊपरी फर्श पर होने लगा है। उधर, वरुणा के किनारे की बस्तियां भी पानी से घिरने लगी हैं। बढ़ते जल स्तर को देखते हुए किनारों के लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए सामान भी समेटने लगे।
केंद्रीय जल आयोग ने रविवार की रात गंगा का जलस्तर 65.53 मीटर रिकार्ड किया। फिलहाल वाराणसी में गंगा खतरे के निशान 71.262 मीटर से अभी 5.73 मीटर नीचे बह रही है। सुबह जहां बढ़ाव की गति पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटा थी, वहीं देर शाम बढ़ाव की रफ्तार चार सेंटीमीटर प्रतिघंटा हो गई। गंगा में उफान से तटीय इलाके के लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं। सर्वाधिक चिंता वरुणा किनारे की बस्तियों में
नक्खीघाट, मीरा घाट, शैलपुत्री, शक्कर तालाब, पुलकोहना, सरैया के निचले स्तरों में घर बनाने वाले हजारों परिवारों को लेकर है। गंगा में बढ़ाव के साथ ही वरुणा किनारे की यह बस्तियां भी पानी से घिरने लगी हैं। अब किसी भी समय बस्तियों में पानी प्रवेश कर सकता है। राजघाट के आनंद कुमार निषाद ने बताया कि लोग अब अपनी गृहस्थी सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए समेटने लगे हैं। कोई रिश्तेदार के
यहां शरण लेने की तैयारी में है तो कोई किराए का मकान ढूंढ रहा है। इधर गंगा किनारे की सामने घाट, नगवा, मलहिया टोला के अलावा अन्य इलाकों में भी बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। गंगा का प्रवाह ग्रामीण इलाकों की बस्तियों की ओर भी बढ़ रहा है। ढाब क्षेत्र की बस्तियों में भी बाढ़ का पानी बढ़ता जा रहा है। मोकलपुर, रमचंदीपुर, गोबरहा समेत आसपास की बस्तियों के पशुपालक अब पशुओं के चारे के लिए परेशान होने लगे हैं। अभी तक सिर्फ दो नावें ही लगाई गई हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक एक भी नाव नहीं लगाई गई है।