मिर्जामुराद/वाराणसी। किसान अब दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ा सकेंगे। इसके लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) मटर, सब्जी सोयाबीन, बाकला, ग्वार जैसी दलहनी फसलों पर शोध कर रहा है। बृहस्पतिवार को शाहंशापुर स्थित आईआईवीआर में विश्व दलहन दिवस पर संस्थान के निदेशक ने यह जानकारी दी।
संस्थान की ओर से विश्व दलहन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर किसानों को बेहतर उत्पादन के बारे में जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर डॉ. एम एन सिंह ने बताया कि इसकी खेती से फसल विविधता के साथ भूमि की उर्वरता बढ़ती है। इस लिए दालों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है। इस मौकेपर डॉ. राकेश दुबे, डॉ. शुभादीप रॉय, डॉ. इंदीवर प्रसाद, डॉ. नकुल गुप्ता, डॉ. सुधाकर पांडे, डॉ. राकेश दुबे डॉ. जगदीश सिंह मौजूद थे।
ये है बनारस में दलहनी फसलों के उत्पादन की स्थिति
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक रबी सीजन 2021 में चना का उत्पादन 474 हेक्टेयर में 14.28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, मटर का उत्पादन 3563 हेक्टेयर में 17.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और मसूर का उत्पादन 244 हेक्टेयर में 14.34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का रहा। वहीं खरीफ सीजन की दलहनी फसल उड़द का 809 हेक्टेयर में 16.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, मूंग का 264 हेक्टेयर में 17.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और अरहर का 4197 हेक्टेयर में 11.82 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन लक्ष्य था।
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दलहनी के उत्पादन बढ़ने से दूर होगा कुपोषण
मिर्जापुराद क्षेत्र के कल्लीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व दलहनी दिवस मनाया गया। इस मौके पर किसानों को दलहनी फसलों के फायदे बताए गए। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुबंशी ने कहा कि विश्व दलहन दिवस मनाने का उद्देश्य दलहन की पैदावार को बढ़ाना है। इससे किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ मिट्टी की उर्रवरा शक्ति भी बनी रहती है। इस अवसर पर केंद्र के प्रबंधक राणा पीयूष सिंह, डॉ नरेंद्र प्रताप, किसान कमलेश सिंह, संजय सिंह, आलोक सिंह आदि उपस्थित थे।