साथ ही डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली सहित कई यूरोपीय और अमेरिकी देशों से आने वाले जल वैज्ञानिक अपने अपने देशों की नदियों के संरक्षण की तकनीक को साझा करेंगे। इस सम्मेलन की रिपोर्ट को सरकारी नीति, कार्यक्रमों आदि में भी रखे जाएंगे। सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से ये कार्यक्रम कराया जाएगा।
इसके अलावा जल की गुणवत्ता को चेक करने के लिए रियल टाइम ट्रैकिंग, प्रदूषण या आवास ढहने से बचाने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियां और शहरी जल निकासी के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्मार्ट आईओटी आधारित निगरानी प्रणालियां विकसित की जाएंगी।
नदियों के जैविक संकेतक की पहचान कर उनकी जैव-निगरानी की जाएगी। इस कार्यक्रम के लिए विभाग से संयोजक प्रो. पीके सिंह, डॉ. अनुराग ओहरी और डॉ. शिशिर गौर समेत कई वैज्ञानिक तैयारियों को अंतिम रूप दे चुके हैं। इसमें नदियों के संरक्षण से जुड़े कई स्टॉल लगेंगे जहां पर तकनीक की प्रदर्शनी होगी।