आईआईटी बीएचयू में मोबाइल इंटरनेट नेटवर्किंग पर शोध की तैयारी चल रही है। इसमें 5जी की तुलना में ऑप्टिकल फाइबर ब्राडबैंड की नेट स्पीड के अधिक होने को लेकर जो अंतराल है इसी पर काम होगा। इस शोध के होने से माना जा रहा है कि आने वाले तीन चार सालों में 5जी तकनीक मोबाइल में काम करने लगेगी।
आईआईटी बीएचयू के रेडियो साइंटिस्ट डॉ. सोमेक भट्टाचार्य जिस रिसर्च करने की तैयारी कर रहे हैं, उसका आने वाले दिनों में मोबाइल उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। डॉ. सोमेक के मुताबिक देश में इस समय मोबाइल पर नेट की औसत स्पीड 14 एमबीपीएस है जबकि ऑप्टिकल फाइबर वाले ब्रॉडबैंड की स्पीड 50 एमबीपीएस के आसपास हैं।
जब 5जी आएगा तो औसत स्पीड के 30 एमबीपीएस तक आने की संभावना है। ऐसे में 30 और 50 एमबीपीएस में जो गैप है, उसको टेराहर्टज बैंडविथ से भरा जा सकता है। डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि इसी तकनीक पर टीम 6जी, 6.5 जी के साथ ही 7जी पर भी रिसर्च करेगी।