पानी से हानिकारक तत्वों को भी निकाला जा सकेगा
डॉ. विशाल मिश्रा ने बताया कि यह उन्नत जल शोधन प्रणाली आम लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। अपशिष्ट जल से हानिकारक तत्वों जैसे अमोनियम, नाइट्रोजन और पॉस्फेट को प्रभावी रूप से हटाकर जल को स्वच्छ बनाती है।
क्या है बायोमास
डॉ. विशाल का कहना है कि बायोमास वह ईंधन है जो जीवित जीवों के जैविक अपशिष्ट पदार्थों जैसे पौधों के अपशिष्ट, पशुओं के अपशिष्ट, वन अपशिष्ट, और नगरपालिका के अपशिष्ट से विकसित किया जाता है। जैविक शब्दावली में, बायोमास शब्द का अर्थ जैविक पौध पदार्थ है, जिसे ईंधन में परिवर्तित किया जाता है और ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है।
कैसे काम करती है जल शोधन विधि
डॉ. विशाल मिश्रा ने बताया की जल शोधन विधि में प्राथमिक, द्वितीयक और सूक्ष्मशैवाल-आधारित तृतीयक शोधन को एक सतत प्रणाली में एकीकृत किया जाता है। अपशिष्ट जल को पहले एक कंटेनर में रखा जाता है। जब उस कंटेनर में गंदगी अपने आप नीचे बैठ जाएगी, उसके बाद दूसरे चरण में मैकेनिकल प्रक्रिया की जाएगी, इसमें पानी को मशीन द्वारा मिलाया जाएगा, इस प्रक्रिया से गंदगी के सूक्ष्म कण आपस में जुड़कर फिर नीचे बैठ जाएंगे।
अब जो जल बचा है उसमें हानिकारक केमिकल जैसे अमोनियम, नाइट्रोजन और पॉस्फोरस घुला रहता है। तीसरे और अंतिम चरण में सूक्ष्मशैवाल-आधारित शोधन प्रक्रिया आरंभ होती है। यह शैवाल हानिकारक केमिकल सोख लेती हैं।