इस केंद्र के माध्यम से शैक्षणिक शोध और दूरसंचार क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के बीच की दूरी कम करने पर जोर दिया जाएगा। सी-डॉट और आईआईटी-बीएचयू के शोधकर्ता, शिक्षक, विद्यार्थी और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में शोध करेंगे। इससे नई तकनीकों के विकास के साथ दूरसंचार क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
देश में छह उत्कृष्टता केंद्र : आईआईटी-बीएचयू में केंद्र की स्थापना के साथ सी-डॉट के उत्कृष्टता केंद्रों का राष्ट्रीय नेटवर्क छह संस्थानों तक पहुंच गया है। इससे पहले आईआईटी कानपुर, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी रुड़की, आईआईटी हैदराबाद और भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलूरू के साथ ये केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं।
भविष्य की तकनीकी क्षमताओं में निवेश है केंद्र
उत्कृष्टता केंद्र में वायरलेस संचार, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संचार प्रणालियों को प्रमुख शोध क्षेत्र बनाया गया है। सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि यह केंद्र केवल शोध का मंच नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की तकनीकी क्षमताओं में निवेश है। संचार की अगली पीढ़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, उन्नत वायरलेस प्रणालियों और बुद्धिमान नेटवर्क से आकार लेगी।
सी-डॉट और आईआईटी बीएचयू मिलकर इन क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकों के विकास को गति देंगे। आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि सी-डॉट के साथ सहयोग से शैक्षणिक शोध को प्रभावी तकनीकी समाधानों में बदलने का मजबूत मंच मिलेगा। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को दूरसंचार क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्नत संचार तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान मिलेगा।