वाराणसी शहर में चल रहे पर्यटन विभाग के निर्माण कार्यों में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक विभाग में 35 प्रतिशत तक कमीशन तय होता है। ऐसे में काम की गुणवत्ता खराब होना लाजमी है। इसका नमूना बलुआ घाट पर देखने को मिला।
एजेंसियों को काम देने वालों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता से नहीं बल्कि अपने कमीशन की फिक्र रहती है। यही कारण है जितनी तत्परता हिस्सा बंटोरने में दिखाते हैं उतनी की तत्परता निर्माण कार्यों की नियमित जांच में दिखते तो इस प्रकार से किरकिरी न होती। घटना के बाद लकीर पीटने के लिए जांच और कुछ दिनों के लिए संबंधित लोगों को इधर से उधर कर दिया जाएगा। कुछ दिन बाद जब मामला ठंडा हो जाएगा तो फिर से यह खेल शुरू हो जाएगा।
पर्यटन विकास के लिए 90 करोड़ रुपये सारनाथ में प्रो पुअर योजना को अंजाम दिया जा रहा है। आए दिन कोई न कोई समस्या यहां आती रहती है। कभी बिजली का पोल गिर जाता है तो कभी सड़क धंस जाती है। कभी सीवर ओवरफ्लो करने लगता है। इसी प्रकार सामनेघाट घाट का निर्माण कार्य 7 करोड़ रुपये से कराया जा रहा है। यहां पर भी कभी घाट के पत्थर टूट जाते हैं तो कभी सीमेंट बह जाती है।