शुगर की बीमारी में हृदय रोग, गुर्दा खराब होने, आखों पर इसके असर होने के साथ ही जरा सी लापरवाही से फेफड़े में सिकुड़न का भी खतरा हो सकता है। इंडियन चेस्ट सोसायटी की ओर से चार दिवसीय छाती रोग विशेषज्ञों के कांफ्रेंस नैपकॉन के दूसरे दिन टीएफसी सहित अन्य जगहों पर विशेष व्याख्यान हुए।
कांफ्रें स में भाग लेने आए मेरठ से डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उनका कहना है कि शुगर के मरीजों को फेफड़े सिकुड़ने संबंधी समस्याएं होने का खतरा अधिक रहता है। कोरोना काल में भी फेफड़े में संक्रमण जैसे मरीज आए। इस बात को लेकर अध्ययन तो बहुत हुए लेकिन इस तरह के केस को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने बताया कि अगर मरीज को खांसी, सांस फूलना हो तब, छह मिनट घूमने के बाद पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल चेक करना चाहिए। अगर वह मानक से कम होता है तब डाक्टर की सलाह पर पीएफटी द्वारा फेफड़ों की कार्य क्षमता की जांच करवानी चाहिए।
शुक्रवार को केजीएमयू में डिपार्टमेंट आफ रेस्पिरेट्री मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत ने अस्थमा की बीमारी से जुड़े बिंदुओं पर विशेष सत्र में चर्चा की। इसमें उन्होंने योग के माध्यम से भी अस्थमा की बीमारी नियंत्रण के बारे में भी बताया। इसके अलावा ट्रेड फैसिलिटी सेंटर बड़ालालपुर सहित अन्य जगहों पर आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन छाती रोग, श्वास रोग,एलर्जी समेत अन्य विषयों पर चिकित्सकों ने चर्चा की। कार्यक्रम में डॉ. मोहित भाटिया, डॉ कुमार उत्सव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।