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Varanasi: जब तक रहेगी सांस आता रहूंगा संकटमोचन के दरबार, अनूप जलोटा बोले- सीएम योगी ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

Sat, 15 Apr 2023 07:11 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

संकटमोचन संगीत समारोह में हाजिरी लगाने पहुंचे मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने कहा कि जब तक मेरी सांस रहेगी यहां कार्यक्रम पेश करता रहूंगा। बताया कि लगातार 25 साल से हनुमान जी का आशीर्वाद मिल रहा है। 
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संकटमोचन संगीत समारोह में भजन गायक अनूप जलोटा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जब तक मेरी सांस रहेगी संकटमोचन के दरबार में हाजिरी लगाने आएंगे। लगातार 25 साल से हनुमान जी का आशीर्वाद मिल रहा है। उनकी ही कृपा से जीवन की नैया भी चल रही है। जब तक गले में आवाज रहेगी मैं बाबा के दरबार में शीश नवाने आता रहूंगा। यह कहना है मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा का।

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संकटमोचन संगीत समारोह में हाजिरी लगाने पहुंचे भजन सम्राट ने कहा कि युवाओं को खुद को सर्वश्रेष्ठ बनाना होगा। संगीत की दुनिया में बेहतर करने वालों को शास्त्रीय संगीत जरूर सीखना चाहिए। अगर वह गजल भी गाएंगे, सूफी गाएंगे, भजन गाएंगे, फोक गाएंगे तो उनमें प्रभाव आ जाएगा। अगर खुद को बेहतर नहीं बनाया तो कहीं भी सफलता नहीं मिलेगी।

121 स्थानों पर मिली है भजन कराने की जिम्मेदारी

अनूप जलोटा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके ओमकार ग्रुप को देश के 121 घाटों पर भजन कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी शुरुआत गोरखपुर के राप्ती घाट से होगी और इसका अंतिम पड़ाव पड़ाव श्रीनगर में झेलम का किनारा होगा।

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ये भी पढ़ें: अनूप जलोटा के गानों पर झूमे लोग, पीएम मोदी को लेकर कही ऐसी बात जिसकी हो रही चर्चा

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इस आयोजन का एक पड़ाव बनारस, प्रयागराज समेत गंगा तट वाले कई शहर हैं। आयोजन में युवाओं और नई प्रतिभाओं के लिए मंच मिलेगा। अनूप ने कहा कि देश को सोने की चिड़िया कह दिया गया और अंग्रेजों ने उसको लूट लिया। मुगलों ने तबाह कर दिया, लेकिन अब पीएम मोदी ने चिड़िया को शेर बना दिया है। अब कोई लूट के दिखाए। जिस देश ने यहां पर इतने साल राज किया। वहां का पीएम अब सनातनी है। इंग्लैंड का प्रधानमंत्री हिंदू है। उसके घर में दिन-रात भगवान की पूजा होती है। इसलिए मैं अब पुरानी लिरिक्स बदल रहा हूं।

संकटमोचन के मंच पर प्रस्तुति देना सबसे बड़ा सौभाग्य

मशहूर सितार वादक नीलाद्री कुमार - फोटो : अमर उजाला
हर साल संकटमोचन दरबार में हम लोग आशीर्वाद लेने आते हैं। सौ का आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा होता है। संकटमोचन संगीत समारोह की 100  साल की यात्रा का यह अहम पड़ाव है। यहां इस मंच पर ऐसे-ऐसे कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं जिनका इतिहास में नाम दर्ज हैं, जिनको हम लोग तस्वीरों में देखते हैं। ऐसे मंच पर प्रस्तुति देना अपने आप में बड़ा सौभाग्य है। यह कहना है मशहूर सितार वादक नीलाद्री कुमार का।
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संकटमोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देने आए नीलाद्री ने कहा कि आज की पीढ़ी सब कुछ बहुत जल्दी सीखना चाहती है लेकिन शास्त्रीय संगीत में यह आसान नहीं है। शास्त्रीय संगीत का मतलब है साधना। हर पीढ़ी में कभी हां कभी ना होता है। वर्तमान पीढ़ी में हां बोलने का कारण और जरिया बहुत है। ऐसे में युवाओं से यही कहना है कि सीखना है तो सहज भाव के साथ धैर्य से गुरु की शरण में जाएं। बिना गुरु की कृपा से ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती है।
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