उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र विरोधी बताया और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन को समर्थन दिया। पूर्व सांसद ने कहा कि पहले कुलपति छात्र हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेते थे अब के कुलपति छात्र विरोधी फैसला लेते हैं। विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्रों से प्रशासनिक अधिकारियों के बातचीत का कोई प्रॉपर चैनल नहीं है।
छात्र विकास ने बताया कि हमारी कुछ मांगों को मौखिक रूप से माना गया था। हम लोग ग्यारह सूत्री मांगपत्र पर नियमावली बनने तक अनिश्चितकालीन प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस दौरान पतंजलि पांडेय, सूर्याभ, राजकुमार डायमंड, शुभम शुक्ला, सौरभ राय, अभिषेक उपाध्याय, हर्ष, अविनाश, मृत्युंजय तिवारी मौजूद थे।
पीएचडी प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय में नई नियमावली जारी की थी। इसमें व्याप्त त्रुटियों के खिलाफ छात्रों ने कई बार परीक्षा नियंता से संपर्क कर ज्ञापन दिया और त्रुटियों को सुधारने की बात कही, लेकिन प्रशासन ने छात्रों की मांगों को नजरअंदाज कर दिया। इसके खिलाफ आक्रोशित छात्र परीक्षा नियंता कार्यालय के मुख्यद्वार पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।