ठेले वाले और दोपहिया वाहनों ने किया अतिक्रमण।
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पुलिस आयुक्त प्रणाली का भी असर नहीं दिखा
वाराणसी में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने पर पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही लोग नई व्यवस्था का असर महसूस करेंगे। छह माह बीतने को हैं। लेकिन, शहर के सबसे संवेदनशील चौराहे पर अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए।
समस्या
-ठेले, आटो और एंबुलेंस वालों की भरमार
-दो पहिया वाहनों का दुकानों के सामने बेतरतीब खड़ा करना
-छात्रों या राजनीतिक दलों द्वारा आए दिन प्रदर्शन करना
-ट्रैफिक पुलिस व नगर निगम द्वारा चालान न काटना
-आसपास बीएचयू को छोड़कर पार्किंग की व्यवस्था न होना
समाधान
-ट्रैफिक पुलिस सप्ताह में दो से तीन बार औचक अभियान चलाए
-नगर निगम ठेले पटरी वालों को हटाने के लिए नियमित कार्रवाई करे
-दुकानदार स्वयं भी गाड़ी या ठेले खड़ा करने से मना करें
-किसी भी तरह के धरना, प्रदर्शन या आयोजन पर रोक लगे
-प्रशासन द्वारा पार्किंग का इंतजाम किया जाए
100 मीटर के दायरे का नियम भी धड़ाम
एसपी ट्रैफिक रहते हुए श्रवण कुमार सिंह ने चौराहों के 100 मीटर के दायरे में वाहनों के खड़े होने पर प्रतिबंध लगाया था। बकायदा इसके लिए सभी चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया गया था। हद तक नियम का पालन भी हो रहा था। लंका, गिरजाघर, रथयात्रा सहित अन्य प्रमुख चौराहों पर गाड़ियां खड़ी होनी बंद हो गई थी। हालांकि कमिश्नरेट लागू होने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था पर जिस तरह का काम होना चाहिए, वैसा अब तक नहीं हो सका।
लोगों को कितना भी मना करें, वो वाहन खड़ा करने से बाज नहीं आते हैं। हर दिन इसी तरह की समस्या से होती है। - सौरभ सोनकर, दवा विक्रेता
लोग वाहन खड़ा कर दवाएं व सामान लेने आते हैं। पुलिस कुछ करती नहीं। हम मना करेंगे तो व्यापार प्रभावित होता है। - विपुल राय, दवा विक्रेता
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने कहा कि सुगम यातायात के लिहाज से शहर को पांच सेक्टर में बांटकर काम कर रहे हैं। कोशिश है कि लोगों को जाम से परेशान न होना पड़े। लोगों से अपील है कि जहां-तहां गाड़ियों को पार्किंग न करें। इससे यातायात बाधित होता है।