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गर्मी का प्रकोप: अस्पतालों की इमरजेंसी में 300 मरीज पहुंचे, 50 को किया भर्ती, 6 ने दम तोड़ा; मॉर्च्यूरी भी फुल

Thu, 20 Jun 2024 05:03 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: मंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर उल्टी, दस्त, चक्कर आने, तेज बुखार वाले 300 से अधिक मरीज पहुंचे, जिसमें 50 से अधिक मरीजों को भर्ती किया गया। इस बीच इलाज के दौरान छह लोगों ने दम तोड़ दिया।
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मंडलीय अस्पताल का चिल्ड्रन वार्ड। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिन में बादलों की आवाजाही से धूप का असर भले ही कम हुआ है, लेकिन बेचैनी से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। अस्पतालों की इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक मौसमी बीमारी से परेशान मरीजों की संख्या में कमी नहीं हो रही है।

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मंडलीय अस्पताल की मॉर्च्यूरी में स्ट्रेचर बुधवार की देर शाम तक 13 शव पड़े रहे। राहत की बात यह है कि मौसम में आई नरमी की वजह से मौत का ग्राफ भी कम हुआ है। सोमवार को जहां 34 लोगों की मौत हुई थी वहीं मंगलवार को भी 18 लोगों ने दम तोड़ा था। अस्पतालों में मरीजों की स्थिति यह है कि अस्पताल की ओपीडी खुलने से पहले ही कई लोग इसलिए पहुंच जा रहे हैं कि डॉक्टर को समय से दिखाकर घर चले जाएं।

जिला अस्पताल की फिजिशियन, बाल रोग विभाग की ओपीडी में मरीजों की भीड़ अधिक रही। कुछ बच्चों को उलटी-दस्त की समस्या थी कि कुछ को तेज बुखार था। डॉक्टर ने दवा देने के साथ अभिभावकों को घर पर साफ-सफाई, धूप से बचाने, खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। 
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यहां ओपीडी में जहां 1200 से अधिक मरीज आए वहीं इमरजेंसी में भी शहरी, ग्रामीण इलाकों से 90 से अधिक मरीज पहुंचे। दो मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसमें जंसा निवासी इकबाल नारायण (65) फुलवरिया पहलू का पुरा निवासी खुर्शीद अहमद (55) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

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इमरजेंसी में 100 ने करवाया इलाज

मंडलीय अस्पताल के हृदय रोग विभाग, बाल रोग विभाग, फिजिशियन से लेकर ईएनटी डिपार्टमेंट में डॉक्टर को दिखाने के लिए लोग खड़े रहे। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह के अनुसार ओपीडी में 1000 से अधिक मरीजों ने अपना इलाज करवाया। इसमें करीब 300 मरीजों को उल्टी दस्त, बेचैनी, बुखार, पेट संबंधी अन्य समस्या थी। 

इसमें बच्चे भी शामिल रहे। इमरजेंसी में भी 100 से अधिक लोगों का इलाज किया गया। इसमें शहर के अलग-अलग जगहों से चक्कर खाकर गिरे करीब 20 लोगों को एंबुलेंस लेकर आई। बताया कि इलाज के दौरान 10 लोगों ने दम तोड़ दिया।

लावारिस शवों को 72 घंटे रखना जरूरी
मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि अस्पताल की मॉर्च्यूरी में बुधवार की शाम तक 18 शव रखे थे। पुलिस की मदद से पांच शवों को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया गया। 13 शव हैं, जिनको स्ट्रेचर पर रखवाया गया है। इसमें आधे से अधिक लावारिस शव हैं। नियमानुसार लावारिस शव को 72 घंटे रखना जरूरी होता है। इसके बाद पुलिस के माध्यम से उसको पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया जाता है।
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