प्रकरण के अनुसार एडवोकेट हरीशंकर पांडेय ने कोर्ट में रिवीजन अर्जी दाखिल किया। कहा गया कि भारतीय संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका के बोस्टन में 21 अप्रैल को पहुंचे थे। यहां पर ब्राउन यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ उनका एक सेशन था। यहां पर राहुल ने भगवान श्रीराम को लेकर विवादित बयान दिए थे।
उन्होंने भगवान राम को 'पौराणिक' बताया था और उस युग पर बताई जाने वाली कहानियों को काल्पनिक कहा था। वही नहीं भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। राम मंदिर का विरोध भी किया था और वह विदेश में जाकर भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं।
इसके संबंध में उसने अवर न्यायालय में परिवाद पत्र दाखिल किया। जिसपर कोर्ट ने सरसरी तरीके से, विधि व्यवस्था के विरोध उसके परिवाद पत्र पोषणीयता के स्थिति पर खारिज कर दिया है। निगरानी कर्ता ने निगरानी अर्जी को स्वीकार करने की गुहार लगाई है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
सिखों पर बयान मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ/ एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। लंबित प्रार्थना पत्र को सुनवाई के बाद कोर्ट ने खारिज कर दिया। अमेरिकी यात्रा के दौरान भारत में सिखों पर बयानबाजी मामले को लेकर सारनाथ के तिलमापुर निवासी नागेश्वर मिश्र ने देश में गृह युद्ध भड़काने की साजिश करार देते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) की अदालत में वाद दाखिल किया था।
जिसके बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने इस वाद को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था। इस अवर न्यायालय के आदेश के खिलाफ नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल किया था। बाद में सत्र न्यायालय ने निगरानी अर्जी स्वीकार करते हुए अवर न्यायालय को पुनः सुनवाई के आदेश दिया था।