हरी और लाल साड़ी होती है इस दिन खास
नीलू मिश्रा ने बताया कि उनका हरियाली तीज का पहला व्रत है। उन्होंने अपनी लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली है। सास के लिए लाल साड़ी खरीदी है। व्रत के दिन सास को भेंट करेंगी। मायके से लाल-हरी रंग की चुनरी प्रिंट वाली साड़ी, चूड़ी और शृंगार के सामान के साथ झूला भी आया है। वहीं पूर्णिमा सेठ ने बताया कि वो नौ साल से हरियाली तीज का व्रत रखती आ रही हैं और हर साल हरे रंग की साड़ी ही पहनती हैं।
विशेष पूजा विधि
पं. सत्यनारायण मिश्रा ने बताया कि हरियाली तीज व्रत में सूर्योदय और सूर्यास्त में पूजा करने का विशेष महत्व होता है। महिलाओं को सुबह स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर बालू से शिवलिंग बनाकर भस्म चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए। इस साल पूजा करने का समय शाम चार बजे से 7:55 तक है। हरी या लाल साड़ी पहनने के साथ ही सोलह शृंगार करने के बाद भगवान को भोग में दूध, दही, बेलपत्र, सफेद फूल, मदार का फूल, शहद, दूध की बनी मिठाई और माता पार्वती को साड़ी के साथ शृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए। कथा भी सुननी चाहिए।