कथा सम्राट के घर पर फहराया तिरंगा
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पंच परमेश्वर से न्याय, ईदगाह से गरीबी का दर्द, पूस की रात से किसान की चिंता, मंत्र से अमीरी और गरीबी का फर्क, कफन से नशे की आदत जैसे सामाजिक मुद्दों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले मुंशी जी पूरी दुनिया के साहित्यकारों में सबसे ऊपर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की अमर कृतियों के अमर चरित्र आज भी लमही गांव में कहीं न कहीं दिख जाते हैं। लमही गांव को राष्ट्रभक्ति के साहित्य की प्रयोगशाला बनानी चाहिए।
लमही गांव में तिरंगा यात्रा
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कहा कि महान उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद को अपने अंतिम समय में यह कसक जरूर थी कि काश देश आजाद हो जाता तो घर पर तिरंगा फहरा पाते। मुंशी जी ने देश के लिए अंतिम सांस ली। देश के लिए लिखते रहे, अंग्रेजों की आंख में खटकते रहे, लेकिन हार नहीं माने। उनका सपना तिरंगे को अपने घर पर सिर्फ फहराने का नहीं, बल्कि उसको सलामी देने का था। भले ही उनके जाने के 11 साल बाद आजादी मिली हो, लेकिन उनके सपने को आज पूरा किया गया।