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Gyanvapi Case: औरंगजेब ने ढहाया विश्वनाथ मंदिर...दिया था फरमान- काशी के मंदिरों और संस्कृत स्कूल को नष्ट कर दो

Mon, 16 May 2022 07:23 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी गजेटियर 1965 में प्रकाशित किया गया था। पेज संख्या 57 पर साफ-साफ कहा गया है कि नौ अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने अपने प्रादेशिक गवर्नर को फरमान जारी किया कि काशी के मंदिरों और  संस्कृत स्कूल को नष्ट कर दें। 
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रकाशित गजेटियर में भी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और बेनी माधव मंदिर के ध्वस्तीकरण का जिक्र किया गया है। 1965 में प्रकाशित गजेटियर में उल्लेख है कि वर्ष 1669 में औरंगजेब के आदेश पर दोनों मंदिरों को गिराया गया था।  

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बनारस के इतिहास पर स्वतंत्र रूप से शोध कर रहे बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि गजेटियर जिले और राज्यों के बारे में सरकारी दस्तावेज होने के साथ सबसे अधिक प्रामाणिक माने जाते हैं। गजेटियर में न सिर्फ जिलों का इतिहास होता है, बल्कि उस जिले के बारे में एक-एक जानकारी होती है।

पेज 25 से 77 तक गजेटियर में वाराणसी का इतिहास

वाराणसी जिले के संदर्भ में वाराणसी गजेटियर 1965 में प्रकाशित किया गया था। गजेटियर के 10वें पृष्ठ पर जिले का प्रशासनिक नाम वाराणसी किए जाने की तिथि 24 मई 1956 अंकित है। उत्तर प्रदेश डिस्ट्रिक्ट गजेटियर वाराणसी का प्रकाशन उत्तर प्रदेश सरकार ने किया था और सरकारी प्रेस इलाहाबाद में छपा था।

पेज 25 से 77 तक इस गजेटियर में वाराणसी का इतिहास दर्ज है। पेज संख्या 57 पर साफ-साफ कहा गया है कि नौ अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने अपने प्रादेशिक गवर्नर को फरमान जारी किया कि काशी के मंदिरों व संस्कृत स्कूल को नष्ट कर दें। फरमान पर काशी विश्वनाथ मंदिर और बिंदु माधव के मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया।

टोडरमल ने स्थापित कराया था पन्ने का शिवलिंग

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी। - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत परिवार के मुखिया डॉ. कुलपति तिवारी के मुताबिक, 1669 में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर का एक हिस्सा तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई थी। इसके पहले 14वीं सदी में जौनपुर के शर्की सुल्तान ने मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया था।

इसके बाद मुगल बादशाह अकबर ने 1585 में विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। अकबर के वित्तमंत्री टोडरमल द्वारा पं. नारायण भट्ट के सहयोग से मंदिर में पन्ने का शिवलिंग स्थापित कराया था। शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा औरंगजेब के आक्रमण के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था।

शिवलिंग को बचाने के लिए महंत परिवार के मुखिया शिवलिंग को लेकर ज्ञानवापी कूप में कूद गए थे। अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्माण के बाद 1839 में पंजाब के महाराजा रणजीत ने सोना दान किया, जिससे मंदिर के शिखर को स्वर्णमंडित कराया गया। 

सर्वे के दौरान मस्जिद के बाहर मुस्तैद रही पुलिस

- फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान बाहर पुलिस और पीएसी के जवान मुस्तैद रहे। गोदौलिया से विश्वनाथ मंदिर गेट नंबर चार और मैदागिन जाने वाले रास्ते पर सभी दुकानें भी बंद रही। इधर से जाने वाले लोगों पर पुलिस की कड़ी नजर रही। पुलिस और पीएसी की टीम पैदल मार्च करती रही।

सोमवार को बैशाख पूर्णिमा की वजह से काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन, पूजन करने वालों की भीड़ भी रही। दोपहर 12 बजे तक गेट नंबर चार से किसी को अंदर दाखिला नहीं मिला। जब सर्वे की कार्रवाई पूरी हो गई, उसके बाद ही लोगों को गेट से मंदिर परिसर में जाने की इजाजत मिली। अन्य दिनों की तुलना में सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
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मस्जिद में सोमवार की सुबह सर्वे टीम के जाने के समय बाहर सीआरपीएफ के जवान तैनात रहे, वहीं अंदर भी पुलिस, पीएसी के जवान भी बॉडी प्रोटक्टर के साथ तैनात रहे। उधर बजरडीहा, शिवाला, रेवड़ी तालाब, सोनारपुरा क्रासिंग आदि जगहों पर पुलिस, पीएसी के जवानों ने पैदल मार्च किया। इस दौरान लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई। 
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