वाराणसी अदालत परिसर का नजारा
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कहा कि पूरी मस्जिद इसी दीवार पर टिकी है। उसके गिराने से ढह जाएगी। आपत्ति में यह भी कहा कि यह सामान्य कमीशन है। इसको दीवार तोड़कर कमीशन करने का कोई अधिकार नहीं है। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता अभय नाथ यादव का कहना है कि कमीशन रिपोर्ट पढ़ने के बाद यदि संतुष्ट नहीं होंगे तो नए कमीशन की मांग करेंगे।
वादी और सरकारी वकील की ओर से दिए गए आवेदन पर मुस्लिम पक्ष ने अदालत में आपत्तियां दर्ज कराईं। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता अभयनाथ यादव और एखलाक अहमद ने कहा कि हम लोगों ने वादी और सरकारी वकील के आवेदन पर अदालत में आपत्तियां दाखिल की हैं। वादी की ओर से 82ग के तहत दीवार तोड़ने के लिए आवेदन दिया गया है। आपत्ति की है कि अगर इसे तोड़ा गया तो पूरी मस्जिद ध्वस्त हो जाएगी। इससे मुस्लिम संप्रदाय की आस्था पर गहरी चोट लगेगी।
उन्होंने आपत्ति की है कि प्रतिवादी के रूप में स्टेट ऑफ यूपी, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी पक्षकार हैं। उनकी ओर से सरकारी वकील का आवेदन वादी के पक्ष में पेश किया जा रहा है। इससे प्रतीत हो रहा है कि सरकारी वकील वादी से मिले हुए हैं। उन्होंने कहा कि मछलियां हमारी हैं, उन्हें मछली के मरने की चिंता अब हो रही है। हमने मछलियां पाली हैं, मछली का कोई मुकदमा नहीं है।
उन्होंने आपत्ति की कि 16 मई को कमीशन की कार्यवाही खत्म हो गई थी। वादी ने हस्ताक्षर करने के बाद बाहर बयान दिया है कि कार्यवाही पूरी हो गई। अब दूसरी कार्यवाही के लिए क्यों आवेदन दे रहे हैं। उन्होंने आपत्ति की है कि 16 मई को बिना हमें सुने शिवलिंग वाले स्थान को सीज करने का आदेश दिया गया। इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया है।
उन्होंने आपत्ति की है कि वादी की ओर से शिवलिंग मिलने की बात की जा रही है। उसका प्रमाण अदालत के पास नहीं आया है, जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है। उसमें बीच में छेद है। जबकि शिवलिंग में छेद नहीं होता है। उन्होंने आपत्ति की है कि अधिवक्ता आयुक्त की ओर से आख्या अदालत में प्रस्तुत नहीं की गई, लेकिन मीडिया में इसे शिवलिंग घोषित कर दिया गया। इससे आख्या की वैधानिकता लीक हुई।