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ज्ञानवापी: खंभों पर संस्कृत के श्लोक का दावा, विवादित स्थल के सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी कराने का भी अनुरोध

Wed, 17 May 2023 10:13 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

अदालत में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि बीते वर्ष एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान मौजूदा समय में ज्ञानवापी के विवादित स्थल पर जो स्ट्रक्चर है, उसके खंभों पर संस्कृत के श्लोक व घंटियां व स्वास्तिक मिले हैं।
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वाराणसी कोर्ट परिसर में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ज्ञानवापी के विवादित स्थल का साइंटिफिक सर्वे और जीपीआर तकनीक से एएसआई से सर्वे कराने संबंधी नया प्रार्थना पत्र मंगलवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में दाखिल किया गया। प्रार्थना पत्र के जरिये ज्ञानवापी परिसर स्थित विवादित स्थल यानी आराजी नंबर 9130 के सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने का अनुरोध भी किया गया है।

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अदालत में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि बीते वर्ष एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान मौजूदा समय में ज्ञानवापी के विवादित स्थल पर जो स्ट्रक्चर है, उसके खंभों पर संस्कृत के श्लोक व घंटियां व स्वास्तिक मिले हैं। मां श्रृंगार गौरी का विग्रह पश्चिमी भाग में है।

मंदिर के पश्चिमी दीवार के ऊपर निर्माण कर शिखर पर तीन गुंबद बनाए गए हैं। उसके नीचे पेंटिंग से मंडप बनाया गया है, जो प्राचीन हिंदू मंदिर का प्रतीक है। अदालत से पश्चिमी दीवार के पास खंडहरनुमा अवशेष, तीन गुंबदों और व्यासजी के तहखाने की जांच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जीपीआर तकनीक और साइंटिफिक पद्धति से कराने की मांग की गई है।
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ये भी पढ़ें: पूरे ज्ञानवापी परिसर के ASI से सर्वे की मांग को लेकर कोर्ट में प्रार्थना पत्र, 22 को होगी सुनवाई

शिवलिंग की चार चरणों में जांच होने पर स्थिति स्पष्ट होगी

हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है। - फोटो : अमर उजाला
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशानुसार वजूखाने के पास मिले शिवलिंग की चार चरणों में जांच होने पर स्थिति स्पष्ट होगी। शिवलिंग के ऊपर कटे खांचे की जांच होगी, तब पता चलेगा कि उसे कब नुकसान पहुंचाया गया। जीपीआर तकनीक से जमीन के नीचे की भी वास्तविकता का पता चल सकेगा। साइंटिफिक सर्वे से विवादित स्थल पर मौजूद स्ट्रक्चर की उम्र और प्रकृति का पता चल सकेगा।

22 मई को पता चलेगा शिवलिंग की जांच कैसे होगी

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने बताया कि 22 मई को जिला जज की अदालत में सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यह अवगत कराएगा कि वजूस्थल स्थित शिवलिंग की किस तरीके से जांच की जाएगी। इस संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण प्रेजेंटेशन भी देगा। इसके बाद जिला जज जैसा आदेश देंगे, उस अनुरूप सर्वे का कार्य शुरू होगा।

मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दाखिल के लिए मांगा समय

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता मुमताज अहमद व रईस अहमद ने कोर्ट में कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आवेदन की कॉपी मिली है। उसका अध्ययन करने के बाद आपत्ति दाखिल की जाएगी। इस पर अदालत ने 19 मई तक का समय दिया और सुनवाई की तारीख 22 मई तय कर दी।

हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा है आदेश

वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वरनाथ के मूल वाद में सिविल जज फास्ट ट्रैक की अदालत ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी स्थित विवादित स्थल के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में मसाजिद कमेटी की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी और सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित है।
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नौ लोगों की तरफ से दाखिल किया गया प्रार्थना पत्र

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पूरे परिसर के सर्वे से संबंधित प्रार्थना पत्र नौ आवेदकों मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, रेखा पाठक, आदि महादेव धर्मालय मुक्ति न्यास परिषद के राम प्रसाद सिंह, शीतला मंदिर के महंत शिवनरायण पांडेय, रंजना अग्निहोत्री, शिशिर चतुर्वेदी और राकेश कुमार अग्रवाल की तरफ से मां शृंगार गौरी के मूल वाद के तहत दाखिल किया।
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