हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशानुसार वजूखाने के पास मिले शिवलिंग की चार चरणों में जांच होने पर स्थिति स्पष्ट होगी। शिवलिंग के ऊपर कटे खांचे की जांच होगी, तब पता चलेगा कि उसे कब नुकसान पहुंचाया गया। जीपीआर तकनीक से जमीन के नीचे की भी वास्तविकता का पता चल सकेगा। साइंटिफिक सर्वे से विवादित स्थल पर मौजूद स्ट्रक्चर की उम्र और प्रकृति का पता चल सकेगा।
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने बताया कि 22 मई को जिला जज की अदालत में सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यह अवगत कराएगा कि वजूस्थल स्थित शिवलिंग की किस तरीके से जांच की जाएगी। इस संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण प्रेजेंटेशन भी देगा। इसके बाद जिला जज जैसा आदेश देंगे, उस अनुरूप सर्वे का कार्य शुरू होगा।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता मुमताज अहमद व रईस अहमद ने कोर्ट में कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आवेदन की कॉपी मिली है। उसका अध्ययन करने के बाद आपत्ति दाखिल की जाएगी। इस पर अदालत ने 19 मई तक का समय दिया और सुनवाई की तारीख 22 मई तय कर दी।
वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वरनाथ के मूल वाद में सिविल जज फास्ट ट्रैक की अदालत ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी स्थित विवादित स्थल के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में मसाजिद कमेटी की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी और सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पूरे परिसर के सर्वे से संबंधित प्रार्थना पत्र नौ आवेदकों मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, रेखा पाठक, आदि महादेव धर्मालय मुक्ति न्यास परिषद के राम प्रसाद सिंह, शीतला मंदिर के महंत शिवनरायण पांडेय, रंजना अग्निहोत्री, शिशिर चतुर्वेदी और राकेश कुमार अग्रवाल की तरफ से मां शृंगार गौरी के मूल वाद के तहत दाखिल किया।