वाराणसी कोर्ट परिसर में वादी पक्ष की महिलाएं (फाइल)
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इस मांग पर भी सुनवाई के लिए जिला जज की अदालत ने 21 अक्तूबर की तिथि नियत की थी। वादिनी महिलाओं की मांग पर आपत्ति पेश करने की बारी आई तो मसाजिद कमेटी की ओर से उनके सीनियर एडवोकेट पेश नहीं हुए और समय मांगा गया।
वादिनी महिलाओं की ओर से कहा गया कि यह आवेदन 17 मई को ही दिया गया था। इस पर कोर्ट ने मसाजिद कमेटी पर 100 रुपये का जुर्माना लगाते हुए सुनवाई की अगली तारीख दो नवंबर तय की। वहीं, वादिनी राखी सिंह ओर से कारमाइकल लाइब्रेरी में मिली गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति को संरक्षित करने की मांग के आवेदन पर भी अदालत दो नवंबर को ही सुनवाई करेगी।
ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों की मांग के मुकदमे में पक्षकार बनने के चार आवेदन को जिला जज की अदालत ने खारिज किया। इसमें अधिवक्ता चंद्रशेखर सेठ, ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ल, काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा के आवेदन शामिल हैं। अदालत ने कहा था कि इस मामले में पहले से समर्थ लोग पक्षकार हैं। वादी को बाध्य नहीं किया जा सकता है कि वह किसी अन्य को पक्षकार बनाए।