Varanasi News: ज्ञानवापी मामले में मुख्तार अंसारी के पक्षकार बनाए जाने की निगरानी अर्जी पर सुनवाई के दौरान वादमित्र ने विरोध किया और कहा कि यह जनप्रतिनिधि वाद है।
अपर जिला जज चौदहवां की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी मामले में मुख्तार अंसारी के पक्षकार बनाए जाने की निगरानी अर्जी पर सुनवाई हुई। निगरानीकर्ता की अर्जी वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने विरोध किया और कहा कि यह जनप्रतिनिधि वाद है जो वर्ष 1991 में दाखिल किया गया था। निगरानीकर्ता ने उक्त आराजी नंबर का जो खसरा दाखिल किया है, वह फर्जी है। अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तिथि 28 अगस्त तय कर दी है।
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वादमित्र ने कहा कि अवर न्यायालय से हाईकोर्ट तक ने इस अभिलेख को साक्ष्य के रूप में नहीं माना और इसके प्रमाणिकता पर सवाल खड़े किए। खसरा में कई जगह दूसरे पेन से लिखा गया है। उस समय भी मंदिर बनारस खास में था। ये जगह कभी किसी और की नहीं थी।
मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करती अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी
इस मामले में मुख्तार की ओर से पहले बहस की गई थी। इसमें कहा गया था कि अंजुमन इंकेजामिया मसाजिद कमेटी को सिर्फ ज्ञानवापी के देखरेख की जिम्मेदारी मिली है। वे मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसमें मुस्लिम पक्ष के संपूर्ण पक्ष रखने का अधिकार निगरानीकर्ता का है। इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड कई साल बाद पक्षकार बना तो उसे क्यों पश्चकार नहीं बनने दिया जा रहा।